नारनौल। अकबरपुर गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत राजनीति विज्ञान के शिक्षक डॉ. संजय शर्मा विद्यालय में राजनीति विज्ञान की पहली प्रयोगशाला स्थापित कर विद्यार्थियों में राजनीतिक चेतना पैदा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 2012-13 में उन्होंने अपने निजी कोष से राजकीय माध्यमिक विद्यालय नारहेड़ी में कंप्यूटर लैब की स्थापना की था। तब वह नारहेड़ी में कार्यरत थे।
वह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अकबरपुर में राजनीतिक विज्ञान की प्रयोगशाला में वह विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराते हैं। मॉडल संसद एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते हैं। इससे विद्यार्थियों में लोकतंत्र एवं संविधान की व्यावहारिक समझ पैदा हो रही है।
यह प्रयोगशाला विद्यार्थियों के लिए राजनीतिक चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यावहारिक अध्ययन का सशक्त केंद्र बन गई है। डॉ. शर्मा का मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है।
30 वर्षों से समाज में जगा रहे शिक्षा की अलख
डॉ. संजय शर्मा 30 वर्षों से शिक्षा और शिक्षण कार्यों से समाज को अपना श्रेष्ठ देने का प्रयत्न कर रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक के रूप में अपना अध्यापन जीवन प्रारंभ करने वाले डॉ. शर्मा आज प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। वह जहां भी रहे हैं, अपनी विशिष्ट शिक्षण शैली, आकर्षक कार्यशैली और सौम्य व्यक्तित्व एवं व्यवहार से वहां अमिट पहचान बनाई है।
शैक्षणिक गतिविधियों पर लिख चुके हैं पुस्तक
डॉ. संजय शर्मा ने शैक्षणिक गतिविधियों पर एक पुस्तक लिखी है जो अन्य शिक्षकों को सरल और सहज अधिगम में मदद करती है। उन्होंने राजकीय माध्यमिक विद्यालय नारहेड़ी में 2012-13 में अपने पैसे से कंप्यूटर लैब की स्थापना की थी। वह पहली बार कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप प्रदान करते हुए उसे पावर प्वाइंट प्रेजेंट बनाया। प्रत्येक अध्याय को रोचक और आकर्षक बनाया। उनके इस प्रयास से विषय को नई ऊंचाइयां मिली और टॉपिक पर बच्चों की रुचि जागृत हुई।
राज्य एवं जिला स्तर पर मिले सम्मान
शिक्षा और समाजसेवा में योगदान के लिए डॉ. संजय को राज्य और जिला स्तर पर अनेक बार सम्मानित किया जा चुका है। सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है। नामांकन और प्रवेश उत्सव जैसे अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए नोडल अधिकारी के रूप में कार्य किया और जिले के नामांकन प्रतिशत को बढ़ाने में योगदान दिया। शिक्षा के साथ वह सामाजिक कार्यों में भी आगे रहते हैं।