महेंद्रगढ़ में ग्रीन कॉरिडोर के दायरे में आए मकान को ध्वस्त करती पोकलेन मशीन।
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महेंद्रगढ़। ग्रीन कॉरिडोर के दायरे में आने वाले निर्माणों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त किया गया। इन मकानों का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। मकानों को तोड़ने के समय भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
राष्ट्रीय राजमार्ग-8 और राष्ट्रीय राजमार्ग-65 को जोड़ने के लिए ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत 221 किलोमीटर लंबा एनएच 152 यमुना एक्सप्रेस हाईवे की तर्ज पर बनाया जा रहा है। यह हाईवे छह फुट ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। छह लेन के हाईवे के साथ दोनों ओर रेलिंग होगी। जिले में रायमलिकपुर, बूढ़वाल, नांगल नूनिया, अमरपुरा, थनवास, कंवाई, भोजावास, भुंगारका, बुचावास, हरनाथ का नांगल, खेड़ा, सुरजनवास, चितलांग, देवास, भालखी से यह हाईवे गुजर रहा है। करीब 9 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिसमें चार हजार करोड़ मुआवजे के लिए तथा पांच हजार रुपये करोड़ निर्माण कार्य पर खर्च होंगे। 2022 के आखिरी माह तक ग्रीन कॉरिडोर परियोजना पर कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। ग्रीन कॉरिडोर बन जाने के बाद महेंद्रगढ़ से चंडीगढ़ 365 किलोमीटर पहुंचने के लिए लोगों को छह घंटे की बजाय चार घंटे ही लगेंगे।
हाईवे का निर्माण कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी मेेघनवास-खेड़ा के पास ग्रीन कॉरिडोर के दायरे में आने वाले मकानों को ध्वस्त किया गया। मेघनवास निवासी अनिल ने दो मंजिला मकान बनाया हुआ था। कंस्ट्रक्शन कंपनी मकान का मुआवजा दे चुकी थी। शुक्रवार को जेसीबी की मकान से ध्वस्त किया। अनिल ने कहा कि पूरा मकान तोड़ने की बजाए निशान लगाए गए हिस्से को ही गिराएं। कंपनी ने अधिकारियों ने कहा कि पूरे मकान का मुआवजा दे चुुके हैं। ऐसे में पूरा मकान ही ध्वस्त किया जाए। इस बीच एक शराबी किस्म के व्यक्ति ने कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया। जिसे पुलिस कर्मियों ने दबोच लिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूूद रहा।