जिले के तीन ब्लॉकों में बड़ी संख्या में किसानों ने बाजरा की जगह मूंग को तरजीह दी है। लगभग 6400 एकड़ रकबे में किसानों बाजरा की जगह इस बार मूंग की फसल लगाई है।
सरकार ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत धान और बाजरा की फसलों के स्थान पर किसानों को वैकल्पिक फसलें लगाने को प्रोत्साहित किया था। जिले में धान होता नहीं है, लेकिन बाजरा काफी होता है। कृषि व किसान कल्याण विभाग ने जिले के तीन ब्लॉकों नारनौल, अटेली और नांगल चौधरी में 9900 एकड़ में बाजरा जगह दलहन फसलें लगाने का लक्ष्य दिया था। ब्लॉक खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. रमेश रोहिल्ला ने बताया कि जिले में इस योजना के तहत किसानों को प्रोत्साहित कर 6400 में बाजरा की जगह मूंग की फसल लगवाई गई। सबसे ज्यादा फसल विविधीकरण अटेली ब्लॉक में हुआ। यहां 3300 एकड़ में बाजरा की जगह मूंग लगाई गई। नारनौल ब्लॉक में दो हजार एकड़ में किसानों ने बाजरा को छोड़ कर मूंग को तरजीह दी। वहीं, नांगल चौधरी ब्लॉक में 1100 एकड़ में किसानों ने बाजरा के स्थान पर मूंग लगाई। नांगल चौधरी में बाजरा का रकबा करीब तीस हजार एकड़ है। यहां फसलों की सिंचाई के लिए नहरी पानी बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह बरसाती पानी पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में कृषि विभाग का यह प्रयास होता है कि किसान उन फसलों को अपनाएं, जिनमें पानी की आवश्यकता कम पड़ती है। राज्य सरकार ने इस बार धान के साथ-साथ बाजरा की फसल का रकबा कम करने का फैसला किया था जिसके तहत बाजरा छोड़ कर दूसरी निर्धारित फसलें लगाने वाले किसानों को प्रोत्सा हन राशि दी गई थी।
बीडीओ डॉ. रमेश रोहिल्ला ने बताया कि किसानों को बाजरा छोड़ कर मूंग का उत्पादन करने को प्रोत्साहित करने के लिए बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया गया। किसानों को बीज की सिर्फ दस प्रतिशत राशि ही खर्च करनी पड़ी। किसानों को बीज चार किलोग्राम की थैली सिर्फ 54 रुपये में दी गई। चार किलोग्राम बीज आधे एकड़ खेत के लिए पर्याप्त हैं। किसानों जितने एकड़ में भी मूंग लगाई, सारे बीज पर अनुदान दिया गया।