जुलाई में सामान्य से आधी हुई बरसात, 8 हजार हेक्टेयर में दोबारा करनी होगी बाजरे की बिजाई
- 50 से 75 एमएम बरसात होनी चाहिए थी हुई 25 एमएम
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बरसात के लिए किया हवन भी लोगों को राहत नहीं दिला पाया। आषाढ़ के आखिरी दिन भी लोग उमस से परेशान रहे। सामान्य से आधी से भी कम बरसात होने के कारण जिले में करीब 8 हजार हेक्टेयर में बाजरा की फसल जल गई। जिसमें किसानों को दोबारा से बिजाई करनी होगी।
महेंद्रगढ़ खंड में करीब 26 हजार हेक्टेयर में बाजरा की बिजाई की गई। कनीना में करीब 18600 हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा बोया गया था। जिले में कुल 82 हजार हेक्टेयर में बाजरा है। तय समय पर बरसात न होने के कारण करीब 10 प्रतिशत एरिया में बाजरा की फसल जल गई। कृषि विभाग के अनुसार आठ हजार हेक्टेयर से अधिक बाजरा नष्ट हो गया। जिसमें किसानों को दोबारा से बिजाई करनी पड़ेगी। इसके अलावा कपास की फसल में 15 से 17 प्रतिशत का नुकसान है। मौसम विभाग के अनुसार महेंद्रगढ़ जिले में औसतन 550 एमएम बरसात होती है। जिसमें करीब 450 एमएम बरसात मानसून के दौरान होती है। जुलाई से 15 सितंबर तक मानसून का समय माना जाता है, जिसमें जुलाई में करीब 100 से 150 एमएम बरसात होती है। अगस्त में करीब 200 एमएम तथा सिंतबर में करीब 100 से 150 एमएम बरसात होती है। जुलाई के पहले 15 दिनों में 50 से 75 एमएम बरसात होनी चाहिए। अगर इस साल की बात करें तो अभी मानसून के सीजन में करीब 25 एमएम बरसात ही हुई है। बरसात के लिए मंगलवार को बरसात के लिए योग स्थली में हवन भी किया गया। हवन के बाद शाम करीब तीन बजे हवन हुआ, जिसमें केवल 4 एमएम बरसात ही हुई।
वर्ष 2019 बरसात का रिकार्ड
जनवरी----6.2 एमएम
फरवरी --3.4 एमएम
मार्च ---7.6 एमएम
अप्रैल---19.2 एमएम
मई -----24 एमएम
जून -----33.5 एमएम
जुलाई---25.2 एमएम
जुलाई के बरसात वाले दिन
5 जुलाई --------------8 एमएम
9 जुलाई--------------9 एमएम
10 जुलाई-------------4.2 एमएम
16 जुलाई ------------4 एमएम
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फसल बिजाई एरिया...
फसल-------------------------महेंद्रगढ़ एरिया---------------------कनीना एरिया
बाजरा--------------------------26000----------------------------------18650
कपास--------------------------7610---------------------------------- 8159
ग्वार--------------------------4050-----------------------------------22
ढेंचा---------------------------166-------------------------------364
ज्वार-------------------------1200-----------------------------650
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बरसात का एतिहासिक रिकार्ड
वर्ष 1995 में 1174 एमएम बरसात रिकार्ड की गई थी। वर्ष 1978 में 975 एमएम बरसात रिकार्ड की गई।1993 में 812 एमएम बरसात दर्ज की गई। सबसे कम बरसात की बात करें तो 2003 में केवल 145 एमएम बरसात हुई। वर्ष 2002 में केवल 182 एमएम बरसात रिकार्ड की गई थी। वर्ष 2005 में केवल 200 एमएम बरसात हुई थी।
वर्जन....
बरसात में देरी होने के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है। बाजरा की फसल को सबसे अधिक नुकसान है। कपास में कुछ एरिया में कीड़ा लगने की रिपोर्ट आई है। अगर अब भी बरसात आ जाए तो काफी हद तक बचाव हो सकता है।
डॉ. जसविंद्र सैनी, उप कृषि निदेशक, नारनौल-महेंद्रगढ़।
फोटो संख्या:52- खेत में उगी बाजरे की फसल- फोटो : Narnol