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चिकित्सकों के 178 पदों में से 63 खाली

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नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। - फोटो : Narnol
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भले ही प्रदेश सरकार अपने सात वर्ष के शासन काल में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हो बल्कि हकीकत यह है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर चल रही है। जिले नागरिक, सामुदायिक एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर 178 चिकित्सकों के पद सृजित हैं इनमें 63 पद खाली हैं। नागरिक अस्पताल नारनौल में 42 में से 15, महेंद्रगढ़ में 52 में से 25 पद खाली पड़े हैं।
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इसके अलावा कुछ महीनों पहले दौंगड़ा अहीर एवं कांटी में बनी पीएचसी में दो-दो पद सृजित है लेकिन वहां पर एक भी चिकित्सक नहीं है। चिकित्सकों की कमी के चलते अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों पर भार बढ़ रहा है। इस वजह एक चिकित्सक को 100 से अधिक ओपीडी करनी पड़ रही है। जिले में प्रतिदिन 4 हजार से अधिक ओपीडी हो रही हैं लेकिन मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों पर पूर्ण सेवा नहीं मिल पा रही। लगभग 13 लाख जनसंख्या वाले जिले में एक भी फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट तथा गॉयनोलॉजिस्ट नहीं है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिले के नागरिक एवं सीएचसी अस्पतालों में नहीं प्रवर चिकित्सा अधिकारी
जिले में नांगल चौधरी, सतनाली, दौचाना, नांगल सिरोही, अटेली, सेहलंग सीएचसी में प्रवर चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) का पद कई महीनों से खाली हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ में तीन तथा कनीना में एक प्रवर चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। मात्र नारनौल में तीन एसएमओ कार्य कर रहे हैं। जिले में 13 एसएमओ के पदों में से मात्र तीन पद ही सृजित हैं। ये पद कई महीनों से खाली पड़े हैं। लगभग दो वर्षों से नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में एसएमओ नहीं है। इस वजह से अस्पताल संबंधित सरकारी कामों में काफी दिक्कतें आती हैं।
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दौंगड़ा अहीर एवं कांटी में नहीं एक भी चिकित्सक
कुछ महीनों पहले दौंगड़ा अहीर एवं कांटी गांव में पीएचसी बनाया है। इन केंद्रों पर सरकार की ओर से दो-दो चिकित्सकों के पद सृजित किए हैं। दोनों ही केंद्र पर एक भी चिकित्सक नहीं है। इन स्थानों पर एक-एक चिकित्सक डेपुटेशन पर लगाया हुआ है। वो सप्ताह में तीन या चार दिन ड्यूटी करते हैं। इससे मरीजों को परेशानी होती है।
जिले में नहीं विशेषज्ञ चिकित्सक
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी अभाव है। जिले में एक भी फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट तथा गॉयनोलॉजिस्ट नहीं है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला अस्पताल नारनौल में तो बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। कुछ दिन पहले ही दो बाल रोग विशेषज्ञों ने अपना इस्तीफा दिया था।
सरकार की ओर से चिकित्सकों के लिए भर्ती निकाली हुई है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिकित्सकों के खाली पद भरे जाएंगे। विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए सरकार को लिखा जाएगा।
-श्याम लाल पूनिया, डीसी, महेंद्रगढ़।
अस्पतालों में न तो दवाइयां हैं और न ही चिकित्सक
जब मैं स्वास्थ्य मंत्री था तो उस समय सभी विशेषज्ञों के पद भरे हुए थे। अस्पताल का नया भवन भी मेरे समय में बना था। उस समय जिले में कई पीएचसी बनवाई थी और चिकित्सकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया था। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हमने बनावा दिया था लेकिन वर्तमान सरकार उसमें अभी तक कक्षा शुरू नहीं कर पाई है। सरकार घोषणाएं ज्यादा करती हैं प्रैक्टिकल काम कम करती है। सही मायने में प्रदेश के अस्पतालों का बुराहाल है। अस्पतालों में न तो दवाइयां हैं और न ही चिकित्सक हैं। गरीब आदमी सबसे अधिक परेशान है। उसे निजी अस्पताल में जाकर ईलाज करवाना पड़ता है। मौजूदा नारनौल के विधायक एवं मंत्री को स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर जिले की स्वास्थ्य संबंधित समस्या रखनी चाहिए।
- राव नरेंद्र सिंह, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री।
भाजपा ने जिले में नहीं प्रदेश में बढ़ाई मेडिकल सुविधा
भाजपा सरकार आने के बाद हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की कोशिश की है। नारनौल में सात मंजिला भवन, ट्रामा सेंटर तथा 100 बेड अस्पताल से 200 बेड का कर दिया है। चिकित्सकों की कमी पूरी देश में कमी है। भाजपा सरकार बनने के बाद 2500 चिकित्सकों की भर्ती की है और 500 चिकित्सकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है। आगे प्रदेश में चिकित्सकों की कमी नहीं रहेगी। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की शुरुआत कोरोना की वजह से नहीं हो पाई। इस वर्ष शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा। कांग्रेस सरकार में जिले में चिकित्सकों की 120 सीटें थीं और 45 चिकित्सक ही काम कर रहे थे।
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-ओमप्रकाश यादव, मंत्री, प्रदेश सरकार।
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