शहर के मोदाश्रम परिसर में तीन दिवसीय ऊंट मेला शनिवार को शुरू हो गया। मेले में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब के साथ-साथ पूरे प्रदेश के अच्छी नस्ल के ऊंट लेकर किसान एवं व्यापारी पहुंचे हैं। पहले दिन करीब 500 किसान एवं व्यापारी ऊंटों को लेकर पहुंचे। शनिवार को मौसम खराब होने की वजह से एक भी पर्ची नहीं कटी। मेले में 25 हजार रुपये से 1 लाख 50 हजार रुपये तक कीमत के ऊंट लाए जाते हैं।
बता दें कि यह ऊंट मेला 200 वर्षों से लगातार चला आ रहा है। यह ऊंट मेला पहले गांव कुरहावटा में लगता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसका स्थान बदलकर अब मोदाश्रम के पीछे कर दिया गया है। मेले में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब के साथ-साथ पूरे प्रदेश के अच्छी नस्ल के ऊंट लेकर किसान एवं व्यापारी पहुंचते हैं। मेले में राजस्थान के नागौर, डिडवाना, परबतसर, प्रदेश की सीमाओं से सटे उत्तर प्रदेश के अनेक गांवों से लोग मेले में पहुंचते हैं।
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है यह मेला
मेले में पिछले 35 वर्षों से पर्ची लेखक का कार्य करने वाले सुखविंद्र सिंह ने बताया कि वर्षों पूर्व सरकार द्वारा इस मेले को मान्यता दी गई थी। पंचायत एवं विकास विभाग द्वारा क्षेत्र के लोगों को अच्छी नस्ल के ऊंट उपलब्ध कराने के लिए इस मेले को सरकार मान्यता प्रदान की थी।
मेले में भाग लेने के लिए राजस्थान के अनेक जिलों से व्यापारी एवं किसान एक सप्ताह पूर्व ही अपने पशुओं को लेकर निकलते हैं। राजस्थान के ऊंटों की अच्छी नस्ल होने के कारण उन्हें अच्छा मुनाफा भी यहां मिलता है। क्षेत्र के किसानों को भी अच्छी नस्ल के ऊंटों के लिए इस मेले का इंतजार रहता है।