शहर एवं स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जिले की साफ-सफाई पर 1534 लाख रुपये खर्च हो चुके, लेकिन स्वच्छता रैंकिंग 2021 जिले की कोई भी नगर परिषद एवं नगरपालिकाएं टॉप रैंकिंग में जगह नहीं बना पाई। हालात ये रहे कि रैंकिंग सुधरने की बजाय पहले से भी कम हो गई। इतना रुपये खर्च होने के बाद भी अगर रैंकिंग नहीं आ रही तो इसका जिम्मेदार काफी हद तक प्रशासन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को स्वच्छ करने के लिए लगातार अभियान चलाए हुए हैं, लेकिन यहां के अधिकारी उनके अभियान को फ्लॉप करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रशासन की ओर से साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर प्रशासन सीमित साधनों से योजना के तहत काम करता तो कहीं हद तो बेहतर रैंक प्राप्त की जा सकती थी।
नारनौल नगर परिषद
स्थायी सफाई कर्मचारी 29
प्रतिमाह वेतन पर खर्च -10.50 लाख रुपये
पालिका रोल पर कर्मचारी -158
वेतन पर प्रतिमाह खर्च -24 लाख रुपये
आउट सोर्सिंग कर्मचारी -12
प्रतिमाह वेतन पर खर्च-2.5 लाख रुपये
टैंपो और ट्रैक्टर डाइवर -30
प्रति माह वेतन पर खर्च-6.39 लाख रुपय
जेसीबी ड्राइवर -01
प्रतिमाह वेतन पर खर्च- 25 हजार रुपये
प्रतिमाह डीजल और पेट्रोल पर खर्च -3.5 लाख रुपये
स्वीपिंग मशीन मेंटीनेंस -4.70 लाख रुपये प्रति माह
प्रतिमाह कुल खर्च : 76.59 लाख रुपय
वार्षिक खर्च : 919.08 लाख रुपये
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महेंद्रगढ़ नगरपालिका :
स्थायी कर्मचारी-21
प्रतिमाह वेतन पर खर्च-9.60 लाख रुपये
पेय रोल कर्मचारी-53
प्रति माह वेतन पर खर्च- 9.85 लाख रुपये
कूड़ा कलेक्शन गाड़ी का पेट्रोल /डीजल--1.60 लाख रुपये (प्रति माह)
स्वीपिंग मशीन की मेंटीनें-4.70 लाख रुपये प्रति माह
कुल खर्च- 25.75 लाख रुपये प्रति माह।
वार्षिक खर्च--309 लाख रुपये
इस बार हम बेहतर करने का प्रयास करेंगे। शहर में 100 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन किया जा रहा है। कूड़ा कलेक्शन वाहनों के जीपीएस भी लगाया जाएगा। प्रोसेसिंग के भी जल्द ही टेंडर लगाए जाएंगे। इस बार बहुत कुछ चीजें बेहतर होंगी। -सुमन लता, ईओ, नगर परिषद नारनौल।