एलएनजेपी अस्पताल में नवजात बच्ची के साथ जच्चा आरती।
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र में लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल में गुरुवार को अस्पताल प्रशासन और स्टाफ की बड़ी लापरवाही देखने को मिली। एंबुलेंस में अस्पताल पहुंची गर्भवती को लेबर रूम तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही व्हीलचेयर। पीड़ा से बिलखती गर्भवती जब खुद अस्पताल के प्रथम तल पर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ने लगी तो पीड़ा बढ़ जाने पर वहीं फर्श पर बैठ गई। जब तक तीमारदारों को व्हीलचेयर मिली तब तक गर्भवती फर्श पर ही बच्ची को जन्म दे चुकी थी। बाद में जच्चा-बच्चा को गायनी विभाग में दाखिल किया गया जहां दोनों स्वस्थ हैं।
गोविंद नगर वासी नौ माह की गर्भवती आरती (30) पत्नी अनिल कुमार को गुरुवार सुबह करीब छह बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजन उसे एक एंबुलेंस से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि एंबुलेंस चालक गर्भवती को अस्पताल की बिल्डिंग के आगे ही छोड़कर चला गया।
अस्पताल के प्रथम तल पर बने लेबर रूम तक जाने के लिए आरती जैसे ही सीढ़ियां चढ़ने लगी तो प्रसव पीड़ा बढ़ गई। आरती को दर्द से बिलखता देख अन्य मरीजों के तीमारदारों ने गायनी विभाग में स्टाफ को सूचित किया और अफरा-तफरी में व्हील चेयर की व्यवस्था की, लेकिन तब तक आरती अस्पताल की सीढ़ियों पर ही बच्ची को जन्म दे चुकी थी।
जच्चा-बच्चा को इस प्रकार से अस्पताल की सीढ़ियों पर पड़ा देख आसपास भीड़ जुट गई और गायनी विभाग से नर्स मौके पर पहुंचीं और दोनों को वहां से उठाकर विभाग में ले जाया गया। जांच करने पर जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ पाए गए। मामले में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में एमएस डॉ. साराह अग्रवाल ने चिकित्सकों के साथ एक बैठक भी की।
कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं था तैनात
अन्य मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने कहा कि अस्पताल यह लापरवाही काफी घातक साबित हो सकती थी। हैरानी की बात तो यह है कि अस्पताल के गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी भी मौजूद नहीं था। गायनी विभाग ने सूचना पहुंच जाने पर स्टाफ ने भी नीचे आने में देर लगाई।
दोषी के खिलाफ करेंगे कार्रवाई : डॉ. साराह
एलएनजेपी अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. साराह अग्रवाल ने कहा कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन वे मामले की जांच कर रही हैं। एंबुलेंस चालक को अस्पताल के अंदर सूचना देनी चाहिए थी। गर्भवती को ऐसे बाहर छोड़कर जाना गलत था। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के बारे में डॉ. साराह ने कहा कि ये दोनों आपातकालीन विभाग के बाहर रखी होती हैं। वहां दिन में कई केस आते हैं इसलिए वहां इनकी जरूरत पड़ती रहती है।