कुरुक्षेत्र। इलाज सिर्फ बीमारियों का ही नहीं बल्कि समाज को खोखला करने वाली बुराइयों का करना भी जरूरी है, इसलिए मैंने डॉक्टरी छोड़कर पुलिस फोर्स को चुन लिया। उनका मकसद समाज से बुराइयों को खत्म करना है। इन बुराइयों को खत्म करने के लिए सबसे पहले इंसान का हृदय परिवर्तन होगा। अगर उससे भी बात न बने तो कानून के दायरे में उसका इलाज करना है। यह बात जिले में सुरक्षा व्यवस्था की बागडोर संभाल रहीं 2014 बैच की आईपीएस जिले की पुलिस कप्तान डॉ. अंशु सिंगला ने महिला दिवस पर कही।
डॉ. अंशु सिंगला ने बताया कि वह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाकर लोगों का दर्द कम करना चाहती थी, इसलिए वे एमबीबीएस करके डॉक्टर बनीं, मगर इंटर्नशिप के दौरान ही एक घटना ने उनको झकझोर कर रख दिया। उसके बाद उन्होंने डॉक्टरी छोड़ दी और पुलिस फोर्स में जाने का फैसला किया। उनके परिजनों ने भी उनके इस फैसले का स्वागत किया। दरअसल, इंटर्नशिप के दौरान उनके पास एक महिला का केस आया। इस महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने दहेज के लिए उसे जला दिया था। इस घटना ने उनको परेशान कर दिया और इसके बाद ही समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने लिए वे आईपीएस अधिकारी बनीं। उनके पति अर्पित जैन भी आईपीएस अधिकारी हैं, वे सिरसा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ट्रेनिंग के दोनों मिले थे और उसके बाद उन्होंने शादी कर ली।
नशे पर अंकुश लगाने पर फोकस
एसपी डॉ. अंशु सिंगला ने बताया कि समाज से नशे को खत्म करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने जिले के सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को नशा पर अंकुश लगाने के आदेश दिए हैं। महिलाओं पर होने वाले अपराध पर भी पुलिस तुरंत कार्रवाई कर रही है।
महिलाओं को प्रकृति ने दिए विशेष गुण
एसपी डॉ. अंशु सिंगला ने बताया कि प्रकृति ने महिलाओं को विशेष गुण दिए हैं। महिलाओं में धैर्य, क्षमता, सहनशीलता तथा मातृत्व के गुण होते हैं। इन गुणों के कारण महिलाएं किसी भी कार्य को कर सकती हैं। पुलिस का पेशा काफी कठिन है, मगर महिलाएं पुलिस फोर्स में आकर समाज में फैली बुराइयों का अंत कर सकती हैं।
पुलिस लाइन में लगाए 400 पौधे
एसपी डॉ. अंशु सिंगला ने बताया कि उनको प्रकृति से प्यार है। पुलिस लाइन में उन्होंने अपने हाथों से 400 पौधे लगाए हैं। वे उन पौधों की देखभाल भी खुद करती है। फरीदाबाद में भी अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने पूरा एक जंगल लगा दिया था।