कृषि विभाग के अधिकारी अब गेहूं के अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों की पहचान के लिए खेतों की मेड़ नापेंगे। जहां वह खेतों में लगाई गई आग का मुआयना करेंगे और आरोपी किसान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त सी जी रजिनिकांतन ने निर्देश दिए है कि खेतों में खड़े फानों में आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। हालांकि सीजन के दौरान किसानों को अवशेष न जलाने का आह्वान हर बार किया जाता रहा है और चेतावनी भी दी जाती है।
यहां तक कि कई किसानों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई भी की, लेकिन इस बार प्रशासन कड़ा रुख अपनाए हुए है, जिसके चलते ही कृषि अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए है, जिसके बाद विभाग के अधिकारियों ने ऐसे किसानों की पहचान के लिये प्रयास आरंभ कर दिये है। इन आदेशों की पालना के लिये कृषि विभाग के अधिकारी फील्ड में जा कर काम करेंगे। इतना ही नहीं कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक करने के लिये सेमीनार और गोष्ठियों का आयोजन करेंगे।
उपायुक्त ने जारी आदेशों में कहा कि राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण अधिनियम 1951 के अंतर्गत खेतों में अवशेष व फाने जलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। आग लगाने से दुष्परिणाम देखने को मिल रहे है। इससे सांस जैसी कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की संभावना होती है।
इतना ही नहीं इसके अलावा भूमि की उपजाऊ शक्ति भी कम हो रही है। राज्य सरकार ने गेंहू के फानों को जलाने से बचाने के लिए स्ट्रारीपर अनुदान पर देने की योजना को लागू किया है और कृषि विभाग के माध्यम से स्ट्रारीपर अनुदान पर दिये जा रहे है।
उन्होंने कहा कि किसानों को इस विषय में जागरूक करने के लिये कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. वजीर सिंह को निर्देश दिये है। किसानों को सरकार की हिदायतों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इन तमाम प्रयासों के बाद भी किसान फानों में आग लगाएगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।