कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ब्रह्मसरोवर के तटों पर लघु भारत का नजारा बना हुआ है, जहां देश की सांस्कृतिक विरासत को एक ही जगह पर देखा जा सकता है। विभिन्न राज्यों के कलाकार अपने-अपने लोक नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं तो कहीं शिल्पकार भी अपने हुनर का बखूबी प्रदर्शन कर रहे हैं।
ब्रह्मसरोवर के तटों पर जहां दिन भर ढोल नगाड़े व बीन की स्वर लहरियां गूंज रही है तो वहीं लोक नृत्यों से कलाकार छठा बिखेर रहे हैं। महोत्सव के 9वें दिन शुक्रवार को सुबह से ही पर्यटक सरस और शिल्प मेले में खरीदारी करने के लिए पहुंचने लगे और धूप खिलने के बाद पर्यटकों की आवाजावी भी बढ़ती रही। पर्यटक एक साथ विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति व शिल्प कला को देख गदगद दिखाई दिए।
इन राज्यों के कलाकारों में मचाया धमाल : हिमाचल प्रदेश के कलाकार पूजा और घट नृत्य, जम्मू कश्मीर के कलाकार धमाली नृत्य व देकू भद्रवाही कुड व रुमाल नृत्य, पंजाब का झूमर व मालवाई गिद्दा, राजस्थान का चरी, उत्तराखंड के कलाकार पांडव नृत्य, मध्य प्रदेश का गंगौर व पांथी नृत्या, झारखंड का पायका नृत्य, ओडिशा का संभालपुरी नृत्य सहित राजस्थान के कच्ची घोड़ी नृत्य, ढेरु गाथा गायन आदि की प्रस्तुति दे रहे हैं। इसके साथ-साथ पंजाब का बाजीगर ग्रुप भी पर्यटकों को बांधने का काम कर रहा है।