कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में श्रीमद्भगवद् गीता आधारित संतुलित प्रकृति-शुद्ध पर्यावरण विषय पर नौवें तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके दूसरे दिन अलग-अलग विभागों में विशेष 11 तकनीकी सत्र और प्लेनरी सेशन का आयोजन किया गया। इसमें विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा प्लेनरी सेशन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विशेष तौर पर युवाओं को गीता का मर्म समझाने पर जोर दिया गया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र की ओर से सीनेट हॉल में वर्तमान वैश्विक पर्यावरण असंतुलन व श्रीमद्भगवद् गीता की प्रासंगिकता विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यातिथि हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया है। ऐसा ग्रंथ केवल भारत के पास है जो मानवता के कल्याण का रास्ता दिखाता है। वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान गीता का संदेश हम सभी के समक्ष दिखाई दिया। भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों ने हमें बचाया। गीता दर्शन भारतीय समाज की समरूपता को प्रदर्शित करती है।
विशिष्ट अतिथि आयुष विवि के कुलपति डॉ. करतार सिंह धीमान ने कहा कि पर्यावरण के साथ ही मनुष्य का स्वास्थ्य जुड़ा हुआ है। मुख्य वक्ता एसआईएसटीई के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल ने कहा कि गीता में निहित संदेश को ग्रहण कर मानव को पर्यावरण के प्रति संरक्षण की मूल अवधारणा को आत्मसात करने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि ग्रीन मैन ऑफ हरियाणा प्रो. एसएल सैनी ने कहा कि गीता सबसे पवित्र ग्रंथ है। लेखक अविनाश कुमार ने कहा कि गीता का ज्ञान सभी तक पहुंचना आवश्यक है।
हिंदी साहित्य एवं गुलजारीलाल नंदा की नीतियों में पर्यावरण और श्रीमद्भागवत गीता विषय पर मंथन किया गया, जिसमें मुख्यातिथि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री रहे। उन्होंने कहा कि अगर गीता को गहराई से समझना है तो आंबेडकर को भी पढ़ना पड़ेगा। विशिष्ट अतिथि पंजाब विवि चंडीगढ़ के प्रो. सुधीर कुमार ने कहा कि गीता का महत्व वर्तमान दौर में इसलिए ज्यादा है क्योंकि आज मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए गीता जैसे ग्रंथ हमारी सहायता कर रहे हैं। विधि विभाग द्वारा आयोजित तकनीकी सत्र में पर्यावरणीय न्याय में गीता के महत्व विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के प्रो. विजय नागपाल, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल और बनारस हिंदू विवि वाराणसी के प्रो. शैलेंद्र कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने गीता के सिद्धांतों और उनके पर्यावरणीय न्याय के संदर्भ में बताया। वहीं संस्कृत-पालि-प्राकृत विभाग तथा संस्कृत एवं प्राच्यविद्या संस्थान की ओर से आयोजित तकनीकी सत्र में श्रीमद्भगवद्गीता में प्रकृति एवं पर्यावरण विषय पर मंथन किया गया। पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग में हुए तकनीकी सत्र में श्रीमद्भगवद् गीता के चिरस्थायी ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों से निपटने में इसकी प्रासंगिकता विषय पर चर्चा की गई।