कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र का भ्रमण करने पहुंचे नेपाल काठमांडू के किसानों के दल के साथ व्
कुरुक्षेत्र। पड़ोसी देश नेपाल में भी अब गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक कृषि मॉडल की चर्चा होने लगी है। प्राकृतिक कृषि मॉडल को देखने के लिए बुुधवार को काठमांडू के समीप चित्तवन जिला से 52 किसान एवं सब्जी उत्पादकों का एक दल गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचा, जहां पर व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने सभी का स्वागत किया। इन किसानों में छह महिलाएं भी थी जो सब्जी उगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
दल के सभी सदस्यों ने फार्म मैनेजर गुरदीप सिंह के नेतृत्व में गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म का दौरा किया और खासतौर पर मिश्रित सब्जियों की फसलों के बारे में जानकारी हासिल की। किसानों के दल में आए जनक राजपुरिया ने बताया कि नेपाल में ‘केरूंगा ताजा तरकारी एवं फल-फूल’ नाम से एक सहकारी संस्था है, जिसके ये सभी किसान सदस्य है। दल के अधिकतर किसान फल-सब्जी उगाते हैं और उसी पर इनकी आजीविका निर्भर है। फिलहाल सभी रासायनिक खेती कर रहे हैं जो नुकसानदायक होने के साथ महंगी भी है। एक समय में केवल एक फसल होती है, ऐसे में किसान घाटे में जा रहा है। दल में आए दीपक, विपिन, जय बहादुर, मेघनाद आदि ने कहा कि आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक कृषि मॉडल किसानों के लिए फायदेमंद है। एक ही खेत में एक समय पर दो-तीन फसलें यदि किसान को मिलेगी तो निश्चित रूप से उसे लाभ होगा। उन्होंने बताया कि नेपाल में मुख्य रूप से धान, मक्का और गेंहू की फसलें होती है, साथ ही सीजन के हिसाब से फल-सब्जियों की फसल ली जाती है। यदि मिश्रित फसल ली जाए तो किसान और सब्जी उत्पादक दोनों को लाभ मिलेगा। नेपाल से आए दल को डॉ. हरिओम सहित डॉ. विनोद कुमार, डॉ. रामगोपाल व डॉ. दिनेश ने प्राकृतिक खेती की पूरी ट्रेनिंग के साथ जीवामृत, घनजीवामृत निर्माण का प्रशिक्षण दिया।