कुरुक्षेत्र। ढांड-कुरुक्षेत्र रोड पर पिंडारसी और पबनावा के बीच 24 सितंबर को हुए दर्दनाक हादसे ने छह परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। इनमें चार महिलाएं और दो मासूम बच्चे शामिल थे। हादसे में जान गंवाने वाले सेक्टर तीन निवासी मासूम हर्ष की कहानी सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली है। जिस बच्चे को उसके पिता ने छह महीने की उम्र में गोद लेकर अपने बुढ़ापे का सहारा माना था, उसी बेटे का शव सामने देखकर पिता स्तब्ध रह गए। वह बेटे को याद करते हुए बिलख पड़े।
राजमिस्त्री का काम करने वाले पिता ने बताया कि हर्ष से रोज हंसी-मजाक होता था। हर्ष कहता था कि वह बड़ा होकर फौजी बनेगा, जबकि वे उससे कहते थे कि वह विदेश जाएगा।
इसी हंसी-मजाक और सपनों के बीच मैंने अपने बेटे की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने की कोशिश की। उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे के भविष्य के सपने संजो रहे हैं, वह इतनी जल्दी उनसे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा। पिता ने बिलखते हुए कहा कि कभी नहीं सोचा था कि परमात्मा उन्हें बेऔलाद ही रख देगा।
जसवंत और उनकी धर्मपत्नी रंजीत कौर की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपने साले के पोते हर्ष को छह महीने की उम्र में गोद लिया था। बच्चे को घर लाते समय उन्होंने कई सपने देखे थे। उन्हें लगता था कि हर्ष बड़ा होकर परिवार का नाम आगे बढ़ाएगा और बुढ़ापे में उनका सहारा बनेगा।
जसवंत ने बिलखते हुए बताया कि जब हर्ष छह महीने का था, तब उसे घर लेकर आए थे। तभी मन में सपना था कि बेटे को पढ़ाएंगे, बड़ा करेंगे और एक दिन उसे विदेश भेजेंगे। मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।