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दो ऑपरेटर 200 किसान, सबके सब परेशान

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दो ऑपरेटर 200 किसान, सबके सब परेशान। ये हालात थानेसर अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद शुरू होने के पहले दिन नजर आए। गेट पास कटवाने के लिए किसान सुबह सात बजे ही लाइन में लग गए। दोपहर के 12 बजे गेट नंबर एक पर 200 से ज्यादा किसानों की लंबी लाइन लगी हुई थी। कई किसानों के तो सुबह सात बजे लाइन में लगकर शाम चार बजे तक भी गेट पास नहीं कटे। 35 डिग्री तापमान के बीच लगातार लाइन में खड़े कई किसानों का सब्र का बांध भी कई बार टूटा और ऑपरेटरों के बहस भी हुई। अव्यवस्था के कारण जहां किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी वहीं ऑपरेटरों को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा। किसानों ने कहा आसपास पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं इतनी लंबी लाइन को देखते हुए प्रशासन को दो तीन ऑपरेटर और बिठाने चाहिए। गेट पास को लेकर जिले की सभी मंडियों में ऐसे ही हालात नजर आए। पिपली अनाज मंडी भी गेट पास के लिए किसानों की लाइन मार्केट कमेटी कार्यालय से बाहर आ रही थी। यहां भी 200 से ज्यादा किसान सुबह से लाइन में लगे हुए थे। मंडी का दौरा करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समक्ष भी किसानों ने इस समस्या को रखा।
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किसान फौजा सिंह ने बताया कि वह 10 किले की धान मंडी लेकर आ चुका है। 30 सितंबर को पोर्टल पर एंट्री कराई थी। अब गेटपास के लिए सुबह से लाइन में लगा हुआ हूं। कहा कि एक किले में 35 से 40 क्विंटल धान की उपज होती है। सरकार कह रही है कि वह एक किले से सिर्फ 25 क्विंटल की ही खरीद करेगी तो सरकार यह भी बताए कि बाकी का बचा हुआ धान किसान कहां लेकर जाए।
किसान साहिल का कहना है कि गेट पास काटने के लिए सिर्फ दो काउंटर बनाए गए हैं, जबकि काउंटर के बाहर 100 से भी ज्यादा किसान गेट पास बनवाने के लिए खड़े हुए हैं। प्रशासन को चाहिए कि किसानों की संख्या को देखते हुए कुछ काउंटर और बनाए जाएं ताकि समय पर किसान आसानी से गेट पास कटवाकर समय पर अपनी फसल बेच घर जा सके।
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किसान अंग्रेज ने कहा कि वह भी छह किले की धान लेकर आया हुआ है और गेट पास के लिए सुबह से लाइन में लगा हुआ है। कमेटी के कर्मचारी एक-एक गेट पास काटने में 15 से 20 मिनट का समय लगा रहे हैं। ऐसे में सभी किसानों का गेट पास एक दिन में कट पाना बिल्कुल भी संभव नहीं होगा।
चार दिन से आठ किले की धान को मंडी में लिए बैठे गांव ऐबला के किसान सुल्तान सिंह ने कहा कि फसल की पोर्टल पर तीन चार दिन पहले एंट्री करा दी थी। आज गेटपास के लिए लाइन में लगा हुआ हूं। सुबह से दोपहर हो गई, लेकिन गेट पास ही नहीं कट पाया है। ऊपर से यहां आसपास पीने के लिए पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
गेट पास के लिए लाइन में खड़े गांव बचगांवा के किसान जगबीर सिंह ने कहा कि उनकी आठ किले की धान 11 दिन से मंडी में पड़ी। व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। आज खरीद शुरू हुई है, लेकिन गेट पास कटवाने में आ रही दिक्कत ने परेशान कर रखा है।
किरपाल सिंह ने बताया कि वह चार घंटे से गेट पास के लिए लाइन में खड़ा हुआ है। इससे पहले किसानों को फसल की सरकारी खरीद शुरू कराने को लेकर जद्दोजहद करनी पड़ी और अब गेटपास के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
गांव किरमिच से आए किसान राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वह बिल्कुल नमी मुक्त धान मंडी में लेकर आया हुआ है। एजेंसी चाहे तो हाथों हाथ उसे खरीद सकती है, लेकिन अभी गेट पास नहीं कटने से परेशानी उठानी पड़ रही है।
बोर्ड सिंह ने कहा कि नौ दिन अपनी धान से साथ मंडी में डेरा डाले हो गए हैं। अब जाकर खरीद शुरू हुई है, लेकिन परेशानी अभी भी खत्म नहीं हुई। हमेशा की तरह इस बार भी गेटपास के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।
किसान राजेश ने बताया कि वह 28 सितंबर को थानेसर मंडी में चार ट्राली धान लेकर आया था। इनमें से उसे सिर्फ दो ट्राली का ही गेट पास दिया। उसके पास धान यमुनानगर में बेचने का शेड्यूल आया। उसने बड़ी मुश्किल से शैड्यूल को ठीक करवाया। अपनी फसल बेचने के लिए मंडी में चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं।
थानेसर मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह ने कहा कि मंडी में 10 दिन पहले धान की आवक शुरू हो गई थी। इतनी धान के गेट पास काटने में फिलहाल थोड़ी परेशानी आ रही है। दो दिनों में यह समस्या हल हो जाएगी।
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