संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव व पूर्व डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. डॉ. राघवेंद्र तंवर को भारत सरकार ने भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष रहेगा।
कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने प्रो. राघवेंद्र तंवर को भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद का अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रो. राघवेंद्र तंवर ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अपने 40 वर्षों के सेवाकाल में कुलसचिव, डीन एकेडमिक अफेयर्स, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, डीन्स सोशल साइंस, इतिहास विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर एमेरिटस जैसे अहम पदों पर कार्य करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को बुलंदियों पर पहुंचाया है। सेवानिवृत्ति के बाद वर्तमान में प्रो. राघवेंद्र तंवर हरियाणा इतिहास और संस्कृति अकादमी के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के विभाजन पर इतिहास से संबंधित अन्य पहलुओं के बारे शिक्षाविद् एवं लेखक प्रो. राघवेंद्र तंवर के कार्यों की सराहना की थी और उनकी पुस्तक का विमोचन भी किया था। इतिहास के क्षेत्र में प्रो. तंवर को अभूतपूर्व योगदान है। अगस्त 1977 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में व्याख्याता के रूप में शामिल हुए डॉ. राघवेंद्र तंवर का एमए इतिहास में दो स्वर्ण पदक के साथ एक उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड है।
उन्हें 1997 में एक ओपन सिलेक्शन प्रोफेसर नियुक्त किया गया था और उन्होंने विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक मामलों और डीन सोशल साइंसेज के रूप में भी काम किया है। वह फरवरी 2015 में सेवानिवृत्त हुए और जुलाई 2016 में उन्हें हरियाणा इतिहास और संस्कृति अकादमी का निदेशक नियुक्त किया गया। तंवर को प्रतिष्ठित यूजीसी नेशनल फेलोशिप (रिसर्च अवार्ड) 2002-2005 से सम्मानित किया गया। उन्होंने 2013-15 में 1947-53 की अवधि के लिए जम्मू और कश्मीर पर एक प्रमुख शोध परियोजना का संचालन किया।