कुरुक्षेत्र। श्रावण मास के अवसर पर सेक्टर-13 स्थित श्री महेश्वर हनुमान मंदिर में प्रवचनों की श्रृंखला हुई। श्री गौ गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के संस्थापक अनिल शास्त्री ने भगवान गणेश के विवाह का प्रसंग सुनाया।
शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश का गजमुख दो दांतों से शोभायमान था। परशुराम ने क्रोधवश अपने फरसे से उनका एक दांत काट दिया। इसके बाद गणेश एकदंत और वक्रतुंड कहलाए। उनके एकदंत और लंबोदर स्वरूप के कारण कोई उनसे विवाह को तैयार नहीं होता था। रुष्ट होकर गणेश अपनी सवारी मूषक से देवताओं के विवाह में विघ्न डालने लगे। परेशान होकर सभी देवता ब्रह्मा के पास पहुंचे।
ब्रह्मा ने अपनी पुत्रियों ऋद्धि और सिद्धि को गणेश के पास शिक्षा ग्रहण करने भेजा। ऋद्धि और सिद्धि ने गणेश को विवाह में विघ्न डालने से रोककर देवताओं के विवाह निर्विघ्न संपन्न करवाए। ब्रह्मा के प्रस्ताव पर गणेश ने ऋद्धि और सिद्धि से विवाह किया, जिनसे उन्हें शुभ और लाभ नामक पुत्र प्राप्त हुए। इस अवसर पर आरआर बंसल, सरला, श्याम सुंदर सिंगला, रश्मि, हर्ष, बाल कृष्ण, राजकुमार, ओमप्रकाश, राकेश जैन, माया देवी आदि उपस्थित रहे।