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Kurukshetra News: ढोल-नगाड़ों, बीन-बांसुरी पारंपरिक वाद्य यंत्रों से गुंजायमान हुआ ब्रह्मसरोवर का तट

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रस्तुति से पहले उत्साहित हरियाणवी कलाकार। आयोजक
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर पर 5 दिसंबर तक चलने वाला अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव ढोल-नगाड़ों, बीन-बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों से गुंजायमान हो चुका है। देश के विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों की ओर से दी जा रही प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की मनमोहक अदाओं ने पर्यटकों का दिल जीत लिया है। खानपान की विभिन्न स्टॉल आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।
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महोत्सव में इस बार गीता महोत्सव में भागीदार राज्य मध्यप्रदेश के साथ-साथ मेजबान राज्य हरियाणा के पवेलियन बनाए गए हैं। इसके साथ-साथ जनसंपर्क विभाग की राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में पर्यटकों की भीड़ म्हारा हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा को चरितार्थ कर रही है। यहां पर पर्यटकों को सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के साथ-साथ हरियाणा के इतिहास को जानने का मौका भी मिल रहा है। अलग-अलग राज्यों से आए हुए शिल्पकारों ने अपनी कला के माध्यम से सभी का मन मोह लिया है, सभी अपने आप में अद्भुत हैं।
हर शिल्पकार की अपनी एक कला है, वो कला जो भारत देश के गौरवशाली इतिहास को बयान करती है। चाहे वो बनारसी साड़ी हो या राजस्थान का देसी खानपान, मुंबई की भेल हो या राजस्थान से आए कलाकार, हर कोई अपनी कला में माहिर है। भारत की इस विरासत, शिल्पकारी, कलाकारी और संस्कृति को देखने के लिए देश-विदेश के लाखों पर्यटक हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंच रहे हैं।
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