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विद्यार्थियों का करना होगा कौशल विकास

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केयू के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियो? - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया है। कार्यशाला के अंतिम दिन ‘डिजाईनिंग टूल्स ऑफ प्रिंट ग्राफिक्स’ विषय पर संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. एसएस बूरा सहित अन्य वक्ताओं ने व्याख्यान दिए।
प्रो. बूरा ने कहा कि भारत में सभी उद्योग ग्राफिक्स एंड पैकेजिंग बिना अधूरे हैं, क्योंकि सभी उद्योग इसके बिना आगे नहीं बढ़ सकते हैं। कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को तकनीकी सीखने की प्रत्येक प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान कर सकता है, जिसमें विद्यार्थियों को अपने हुनर के कौशल का विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी ने एक से अधिक क्षेत्रों में अपनी महत्ता को साबित किया है। अब विद्यार्थियों भविष्य में आने वाली हर चुनौती का सामना करना होगा, ताकि वे अपनी प्रतिस्पर्धा साबित कर सके।
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मुख्य वक्ता के रूप में ऑनलाइन जुड़े राजेश शर्मा, सेंट जोसफ कम्युनिकेशन (कनाडा) ने ‘इम्पोजिशन टेक्निक इन न्यूजपेपर, बुक एंड मैगजीन डिजाइनिंग विषय पर व्याख्यान दिया। बताया कि कनाडा में पैकेजिंग डिजाइनिंग में कुशल कर्मियों की जरूरत है, क्योंकि यह उद्योग पिछले तीन दशकों से अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए है। उद्योगों में पांचवीं जनरेशन की तकनीक आरंभ हो चुकी है। विद्यार्थी खुद को तैयार रखें, ताकि वे इस तकनीकी में कुशल कार्य कर सके।
वहीं, दूसरे सत्र में ऑनलाइन जुड़े वक्ता प्रविंद्र कुमार (डिजाइनिंग एंड मेंटर हैड स्कील चंडीगढ़) ने ‘ईजीवे टू लर्न 3-डी करेक्टर एनीमेंटर’ विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने 3-डी कैरेक्टर एनिमेटर, क्लासिकल एनीमेशन, फिल्म बुक, एनिमेशन में ड्राइंग की महत्वपूर्णता पर, स्क्प्टि राइटिंग, आईडिया रिसर्च, इंड्रोएमिमेशन, माया एवं बलेंडर सॉफ्टवेयर पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोई भी नागरिक एनिमेटर बन सकता है, क्योंकि 3-डी एनिमेशन हर कोई सीख सकता है और सफल कॅरियर बना सकता है।
पैकवल कंटेनर्स यमुनानगर के रजत गुलाटी ने ‘इंडियन पैकेजिंग इंडस्ट्री सनेरियो’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग में गत्ता उद्योग का सर्वोपरि स्थान है, क्योंकि यह वातावरण के अनुकूल है। देश के सभी उद्योग आयात-निर्यात में गत्ते का उपयोग सबसे ज्यादा करते हैं।
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इसके पश्चात जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक प्रो. बिंदु शर्मा ने कार्यशाला के समापन अवसर पर वक्ताओं को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया तथा विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। इस अवसर पर कंवरदीप शर्मा, सहायक प्रोफेसर डॉ. आबिद अली, डॉ. अभिनव, डॉ. तपेश किरण, डॉ. रोशन मस्ताना, सुनीता, अर्पणा, कंचन शर्मा, सचिन वर्मा, अमित जागड़ा, राहुल अरोड़ा, मोनिका, राकेश कुमार, जितेंद्र रोहिला आदि मौजूद रहे।
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