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सिक्किम, हरिद्वार और लद्दाख के गुरुद्वारों का प्रबंध सिखों को मिले: झींडा

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कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने तीन ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबों का प्रबंध सिख कौम को देने की मांग की है। उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी महाराज के जीवन से जुड़ी यात्राओं का जिक्र करते हुए यह मांग उठाई है।
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झींडा ने बताया कि श्री गुरु नानक देव जी की तीसरी यात्रा के दौरान सिक्किम में पानी की समस्या थी। गुरु साहिब ने अपनी लाठी ग्लेशियर में मारी, जिससे एक कुंभ बन गया। सन 1982 तक यह स्थान गुरुद्वारा डांग मार साहिब के नाम से प्रसिद्ध था। अब सिक्किम सरकार ने इसे बौद्ध धर्म को सौंप दिया है, जो अनुचित है। हरियाणा समिति ने गृहमंत्री अमित शाह और सिक्किम के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुरुद्वारा वापस बनाने की मांग की है। हरिद्वार में गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी साहिब पर भी भाजपा सरकार ने केंद्र सरकार को एक न्यास बनाकर दे दिया है। झींडा ने इसे सरासर अनुचित बताया है। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से यह स्थान सिखों को देने की अपील की है।

लद्दाख गुरुद्वारा और अखिल भारतीय गुरुद्वारा अधिनियम की मांग
झींडा ने लेह लद्दाख की एक घटना का भी उल्लेख किया, जहां गुरु नानक देव जी ने एक दानव को शांत किया था। इस ऐतिहासिक स्थान की सेवा के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उच्च न्यायालय में मामला दायर किया था। उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर को अलग देश बताते हुए इसे कमेटी के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया। प्रधान झींडा ने कहा कि वे अखिल भारतीय गुरुद्वारा अधिनियम का मुद्दा उठा रहे हैं, ताकि देशभर के गुरुद्वारों का प्रबंध सिख कौम संभाल सके।
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