संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सरस्वती रिवर फ्रंट योजना को पूरा होने में अभी भी एक साल से ज्यादा का समय लगेगा। बार-बार योजना में बदलाव होने से इस योजना सिरे नहीं चढ़ रही है। हालांकि सरस्वती हेरिटेज बोर्ड ने अब सरस्वती नदी के आसपास जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही योजना पर आगामी काम शुरू होगा।
वहीं सरस्वती नदी के किनारों पर आसपास के लोगों की ओर से कब्जे के मामले भी सामने आ रहे हैं। इन कब्जों को हटाना भी बोर्ड के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होंगा। हालांकि विभाग चिह्नित करने की प्रक्रिया के दौरान इन कब्जों को हटाने का दावा कर रहा है। उधर, विभाग अब तक तीन बार योजना में बदलाव कर चुका है।
शुरुआत में विभाग ने पिपली से ज्योतिसर तक नदी में नौका विहार करने की योजना बनाई थी, इस पर अधिक बजट खर्च होने पर विभाग में योजना में बदलाव किया था। उसके बाद विभाग ने पिपली में 800 मीटर में नौका विहार की योजना बनाई थी, लेकिन 800 मीटर में यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। अब विभाग ने अंतिम तौर पर 500 मीटर में योजना का अमलीजामा पहनाने पर काम शुरू किया है।
इस 500 मीटर में नौका विहार योजना पर विभाग की ओर से करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पर्यटन मंत्री कंवर पाल गुर्जर योजना को लेकर सरस्वती चैनल स्थल का दौरा चुके हैं। इस योजना का उद्देश्य कुरुक्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है। अभी इस योजना को पूरा होने में एक से दो साल का समय लग सकता है।
सरस्वती नदी में निरंतर बहते जल की व्यवस्था चुनौती
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के सामने सरस्वती में निरंतर बहते जल की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती रहेगी। हालांकि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि झील बनाकर नौका विहार योजना को पूरा किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने योजना तैयार कर रखी है।
सरकार कब्जेदारों ने जमीन लेगी वापस : अरविंद कौशिक
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता अरविंद कौशिक ने बताया कि योजना को लेकर बोर्ड की ओर से जमीन को चिह्नित करने का कार्य किया रहा है। जिन लोगों ने सरस्वती व इसके आसपास की जमीन पर कब्जा किया होगा तो उसे कब्जा मुक्त कराया जाएगा। पहले पिपली से ज्योतिसर तक योजना पर काम किया जाना था, अब पहले चरण में 500 मीटर योजना पर काम किया जाएगा।