कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में पहुंचे संतों का महंत राजेंद्र पुरी ने सम्मान किया, जिस दौरान कहा कि सनातन धर्म बहुत ही विशाल है जो सभी को स्वीकार करता है। यह सनातन की उदारता एवं महानता है। उन्होंने कहा कि देश के संत महापुरुषों के प्रयासों तथा प्रचार प्रसार से पूरे विश्व के युवाओं में सनातन के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। सनातन सूर्य जितना सत्य है। धर्म किसी सीमा में नहीं आता है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि सत्य, प्रेम और करुणा ही हमारे लिए धर्म है, इसलिए इसमें समरसता, सामंजस्य व सद्भाव है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म की विशालता को, उदारता को, महानता को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सनातन धर्म की पवित्रता की रक्षा और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। सनातन धर्म शुद्ध अमृत के सार का प्रतीक है। धर्म के पहले शुद्ध शब्द लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सनातन धर्म अपने शुद्धतम रूप का प्रतीक है। हिन्दू धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो अपने अंदर विज्ञान के आविष्कारों और दर्शनशास्त्र के चिंतनों का पूर्वाभास है। यही एक धर्म है जो मानव-जाति के दिल में यह बात बैठा देता है कि भगवान हमारे निकट हैं।