कुरुक्षेत्र। साइबर ठगों ने फर्जी शेयर ट्रेडिंग एप के जरिये बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। करनाल जिले के पोपड़ा गांव निवासी प्रॉपर्टी एडवाइजर संदीप सिंह के साथ ठगों ने आसान और तगड़ा मुनाफा दिखाकर 2.54 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर डाली।
पुलिस को दी शिकायत में संदीप सिंह ने बताया कि अक्तूबर महीने में उन्हें व्हाट्सएप पर कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटी (इंडिया) लिमिटेड का प्रतिनिधि बताया और शेयर मार्केट में कम निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया। विश्वास जीतने के लिए ठगों ने ऑनलाइन फॉर्म भरवाया और आधार-पैन कार्ड के जरिये केवाईसी प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके बाद फर्जी प्रमाणपत्र भेजकर एससीएचएन डब्ल्यू नाम का एप इन्स्टॉल करवाया।
शरुआत में सिर्फ 10 हजार रुपये जमा करवाए गए। हर ट्रांजेक्शन के बाद एप पर आकर्षक मुनाफा दिखाया जाता रहा। धीरे-धीरे राशि बढ़ाते हुए ठगों ने अलग-अलग खातों में कुल 2.54 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। एप पर 3.65 लाख रुपये तक बैलेंस दिखाया गया। जब संदीप ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ठगों ने पहले डेढ़ लाख रुपये और जमा करने की शर्त रखी और बाद में धमकियां देनी शुरू कर दी। अभी भी ठग फोन करके पैसे जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं।
शिकायत मिलने पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर थाना प्रभारी महेश कुमार ने बताया कि यह शेयर ट्रेडिंग स्कैम का क्लासिक पैटर्न है जिसमें पहले केवाईसी के नाम पर विश्वास जीता जाता है और फिर फर्जी एप के जरिये लगातार झूठा मुनाफा दिखाकर पैसे ऐंठे जाते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर, लिंक या एप पर पर्सनल डॉक्यूमेंट्स शेयर करने या पैसे ट्रांसफर करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें। निवेश के नाम पर आने वाले लालच भरे ऑफर से सावधान रहें।
टास्क पूरा करने के नाम पर 3.74 लाख की ठगी
एक अन्य मामले में ठगों ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारी रमेश कुमार को टेलीग्राम पर टास्क पूरा करने के नाम पर शिकार बनाया। 9 नवंबर को शुरू हुए इस फ्रॉड में पहले 40 रुपये का मुनाफा देकर विश्वास जमाया गया। इसके बाद दो हजार व पांच हजार रुपये लगवाकर 800 व 2300 रुपये का मुनाफा देकर लालच बढ़ाया। ठगों ने 50 हजार से शुरू करवाकर धीरे-धीरे अलग-अलग खातों में कुल 3.74 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो हर बार नया बहाना बनाकर और राशि जमा करवाई गई। आखिर में सारा पैसा लेकर ठग गायब हो गए। शिकायत मिलने पर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।