संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सवा लाख से एक लड़ाऊं, तभी गोबिंद सिंह नाम कहाऊं.., संदेश के साथ जिले भर में दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस दौरान उत्साह और श्रद्धाभाव से लबरेज संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष शीश नवाया। समागम में हर तरफ शब्द कीर्तन और वाहेगुरु की गूंज सुनाई देती रही।
ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में गुरुद्वारा साहिब के हेड ग्रंथी भाई गुरदास सिंह ने गुरु चरणों में सरबत के भले के लिए अरदास की। इसके उपरांत दीवान सजाया गया, जिसमें श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई गुरबचन सिंह के अलावा गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी जत्थे ने गुरुबाणी कीर्तन किया। सिख मिशन हरियाणा के दाढ़ी जत्थे ज्ञानी रघबीर सिंह ने संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा।
इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के सदस्य जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना, शिरोमणि अकाली दल हरियाणा महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रविंदर कौर, शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के प्रदेश प्रवक्ता कवलजीत सिंह अजराना, प्रदेश महासचिव सुखजिंदर सिंह मसाना, प्रदेश प्रवक्ता कंवलजीत सिंह अजराना, राजिंदर सिंह आदि ने गुरु चरणों में हाजिरी भरी
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने का लिया ऐतिहासिक फैसला : संदीप सिंह
पिहोवा। गुरु गोबिंद सिंह सच्चे त्याग और वीरता की मिसाल थे। उन्होने अन्याय, अधर्म, अत्याचार और दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। यह बात खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह ने रविवार को अपने कार्यालय में गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते कही। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सैकड़ों वर्ष पूर्व मुगलों के जुल्म का सामना करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले चार साहिबजादों को हमेशा याद करने के लिए 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
गुरु गोविंद सिंह धर्म रक्षक के साथ ही संघर्षशील वीर योद्धा भी थे: डॉ. मिश्र
कुरुक्षेत्र। गुरु गोविंद सिंह एक महान कर्मप्रणेता, अद्वितीय धर्म रक्षक, ओजस्वी वीर रस के कवि के साथ ही संघर्षशील वीर योद्धा भी थे। गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के 10वें और अंतिम गुरु थे। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने सिखों के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कहा कि गुरु गोबिंद सिंह मानव समाज के उत्थान, धर्म और राष्ट्र के नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए त्याग एवं बलिदान की मानसिकता से ओत-प्रोत थे, तभी स्वामी विवेकानंद ने गुरुजी के त्याग एवं बलिदान का विश्लेषण करने के पश्चात कहा है कि ऐसे ही व्यक्तित्व के आदर्श सदैव हमारे सामने रहना चाहिए।
युवा वर्ग नशा का त्याग कर गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने का लें प्रण: बाबा सुरेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
बाबैन। गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब पातशाही नौवीं में खालसा पंथ के रचयिता, कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर विशाल कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। इस दौरान बाबा सुरेंद्र सिंह ने कहा कि युवा नशा व अन्य सामाजिक बुराइयों का त्याग कर गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण लें।
इस अवसर पर रागी व दाढ़ी जत्था द्वारा गुरु की महिमा का गुणगान किया गया और गुरु का लंगर जलेबी के साथ अटूट बताया गया। इस अवसर पर अमेरिका से अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व में सिख संगतों ने आकर गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब पातशाही नौवीं में विशेष सेवा की और वहां की संगत की और से गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव की बधाई दी। इस अवसर पर बाबा सुरेंद्र सिंह ने गुरदीप सिंह, गुरतेज सिंह, बलकार सिंह, बुटा सिंह, हरप्रीत सिंह, हरपाल सिंह, बलबीर सिंह, बलकार सिंह सहित सेवादारों को सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया। इस अवसर पर देश एवं विदेश से आई संगतों की खुशहाली के लिए बाबा सुरेंद्र सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने अरदास कर उनकी खुशहाली की कामना की।
इस दौरान बाबा सुरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने 1669 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर मानवता के इतिहास में नया इतिहास रचा था। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने बच्चों तक का बलिदान दिया, ऐसा उदाहरण इतिहास में कहीं नहीं मिलता। बाबा सुरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपने जीवन में प्रत्येक जंग हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए लड़ी और अपने बेटों तक का बलिदान दे दिया था।
गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब पातशाही नवीं मं शबद कीर्तन सुनती संगत। संवाद- फोटो : Kurukshetra
गुरुद्वारा छठी पातशाही में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष शीश नवाती संगत। संवाद- फोटो : Kurukshetra
गुरुद्वारा छठी पातशाही में शबद कीर्तन करता रागी जत्था। संवाद- फोटो : Kurukshetra