कुरुक्षेत्र से भाजपा के नए उम्मीदवार को लेकर चर्चा तेज है। इस सीट पर सीएम की भी साख का सवाल है। राजनीतिक दल धर्मनगरी के सियासी रण में अपनी-अपनी बिसात बिछाने में लगे हुए हैं।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के सियासी रण में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटियां बिछाने में लगे हैं। इस सीट पर एक ओर विपक्षी पार्टियों ने उम्मीदवार उतारने के साथ ही प्रचार अभियान तेज कर दिया हैं, वहीं सत्ताधारी भाजपा की ओर से फिलहाल प्रत्याशी का इंतजार है। पहले कांग्रेस समर्थित आप के डा. सुशील गुप्ता और फिर इनेलो की ओर से अभय चौटाला के उतरने से हॉट सीट बन चुकी कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर अब हर किसी की निगाहें टिक गई हैं।
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विदित हो कि लोस चुनाव-2019 में कुरुक्षेत्र सीट पर नायब सिंह सैनी तीन लाख से अधिक मतों से विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के निर्मल सिंह को शिकस्त दी थी लेकिन अब नायब सिंह सैनी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और करनाल विस सीट से चुनाव की तैयारी में हैं।
ऐसे में कुरुक्षेत्र से भाजपा के नए उम्मीदवार को लेकर लोगों में कौतूहल बना हुआ है। यह सीट प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके नायब सिंह सैनी के लिए भी अहम है। ऐसे में माना जा रहा है कि उम्मीदवार चयन में भी उनकी राय अहम होगी।
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कुरुक्षेत्र सीट पर नए प्रत्याशियों की दावेदारी से इस बार नए समीकरण बनने तय हैं, हालांकि भाजपा का प्रत्याशी घोषित होने के बाद ही सियासी बिसात पर शह-मात का खेल शुरू होगा। फिलहाल इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. सुशील गुप्ता ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है, जबकि अभय चौटाला 25 मार्च से अपना चुनावी शंखनाद करने वाले हैं, इससे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ने लगी है।
उधर, भाजपा प्रत्याशी को लेकर जहां जिंदल परिवार के नाम की जोरों पर चर्चा है, वहीं कई अन्य नामों का जिक्र किया जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों की मानें तो पार्टी के लिए यहां से जीत बड़ी मायने रखने वाली है। ऐसे में राजनीतिक परिदृश्य से लेकर जातिगत समीकरण तक साधने का प्रयास किया जा रहा है।
अभय चौटाला कुरुक्षेत्र पहुंचे, बंद कमरे में रणनीति पर मंथन
रविवार को इनेलो नेता व लोकसभा प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि वे 25 मार्च से कुरुक्षेत्र लोकसभा के सभी हलकों में कार्यकर्ताओं से रायशुमारी शुरू करेंगे। यह चुनाव सभी कार्यकर्ता मजबूती से लड़ेंगे और जीत दर्ज करेंगे। इस दौरान चौटाला ने बंद कमरे में कुछ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की, जिसमें शेर सिंह बड़शामी, गगनजोत संधू सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।