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नेशनल हाइवे पर 40 किमी एरिया में सिर्फ दो एंबुलेंस, उसमें भी न ईएमटी और न ऑक्सीजन

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कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में खडी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस । - फोटो : Kurukshetra
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नरेंद्र शर्मा
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों की जान राम भरोसे..., कहने पर आश्चर्य नहीं होगा, क्योंकि स्वास्थ्य महकमे की एंबुलेंस की स्थिति काफी दयनीय है और महकमे के अधिकारी बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर स्वयं अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के पश्चात तो विभाग ने एंबुलेंस में रखे दर्जनों अग्निशमन यंत्रों को रिफिल कराने के लिए भेजा है। जब सरकारी एंबुलेंस के स्टेशनों और उनकी सेवाओं के बारे में जानकारी जुटाई गई तो स्थिति चौंकाने वाली मिली।
नेशनल हाईवे पर जिला अंबाला की सीमा गांव मोहड़ी से लेकर जिला करनाल की सीमा गांव झिरबड़ी तक के 40 किलोमीटर क्षेत्र में मात्र स्वास्थ्य विभाग की दो एंबुलेंस तैनात हैं। ऐसा कोई दिन नहीं निकलता, जिस दिन नेशनल हाईवे पर सड़क दुर्घटना न होती हो, लेकिन खानपुर और पिपली पीएचसी पर खड़ी इन दोनों एंबुलेंस पर ईएमटी ही उपलब्ध नहीं है। एंबुलेंस में मरीज को आपातकालीन सेवाएं देना, जिसमें ऑक्सीजन तक देने की जिम्मेवारी ईएमटी को सौंपी गई है, लेकिन जब एंबुलेंस पर ईएमटी ही नहीं है तो कैसे मरीज को उपचार दे सकता है। यही नहीं अकेले एंबुलेंस चालक को सड़क दुर्घटना में घायल हुए मरीजों को उठाने में जो परेशानी झेलनी पड़ती है, शायद ही विभाग का कोई अधिकारी इससे वाकिफ हो। एंबुलेंस चालकों ने बताया कि कई बार सड़क दुर्घटना का शिकार हुए घायल व्यक्ति को एंबुलेंस में बैठाने के लिए राहगीरों की मदद लेनी पड़ती है। वहीं, एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी होने के चलते कई बार दूसरी एंबुलेंस मौके पर भेजनी पड़ती है। (संवाद)
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मोहड़ी से झिरबड़ी 40 किमी, 2 एंबुलेंस, बिना ईएमटी घायल को एंबुलेंस में शिफ्ट करना बेहद चुनौती
पिपली से मोहड़ी 33 किलोमीटर और पिपली से झिरबड़ी करीब 7 किलोमीटर दूर पड़ता है। इस बीच खानुपर और पिपली पीएचसी पर बिना ईएमटी के 2 एंबुलेंस तैनात हैं, लेकिन पिपली क्षेत्र में होने वाली सड़क हादसे में घायल मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए पिपली पीएचसी में खड़ी एंबुलेंस को भेजा जाता है। जब एंबुलेंस चालक घायल व्यक्ति को उठाने के लिए मौके पर पहुंचता है तो 10 से 15 मिनट लगते हैंऱ् और एलएनजेपी अस्पताल तक लेकर आने में 20 से 30 मिनट तक का समय लगता हैं, लेकिन चिकित्सकों की माने तो मरीजों को ऑक्सीजन सहित प्राथमिक उपचार तत्काल दिया जाना चाहिए, ताकि मरीज अस्पताल पहुंचने तक स्थिर रहे। डॉक्टरों का कहना है कि हर एंबुलेंस पर ईएमटी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि वह घायल व्यक्ति की स्थिति को देख एंबुलेंस में ही प्राथमिक उपचार दे सकता है।
एलएनजेपी में मात्र एक एंबुलेंस, जिसकी ऑक्सीजन मशीन खराब
मिली जानकारी के अनुसार एलएनजेपी अस्पताल में मात्र एचआर 65ए 8831 एक एंबुलेंस हैं, लेकिन पिछले करीब पांच माह से एंबुलेंस की ऑक्सीजन मशीन खराब पड़ी है। अगर जिला अस्पताल से पीजीआई चंडीगढ़ या फिर करनाल मेडिकल कॉलेज तक किसी मरीज को ले जाना पड़ता है तो दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ती है।
इस्माईलाबाद में एक एंबुलेंस, न ईएमटी
जानकारी के अनुसार इस्माईलाबाद क्षेत्र में मात्र एक एंबुलेंस तैनात है, जो पिहोवा और अंबाला तक आरएसए को उठाती है, लेकिन इस एंबुलेंस पर भी ईएमटी उपलब्ध नहीं है। एंबुलेंस चालकों को पुलिस व राहगीरों की मदद लेकर घायल व्यक्ति को एंबुलेंस में शिफ्ट करना पड़ रहा है। कई बार तक किसी की हैल्प न मिलने पर किसी ना किसी का इंतजार करना पड़ता है।
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एक एंबुलेंस में ऑक्सीजन संबंधित दिक्कत, ईएमटी पर्याप्त
फिल्ट मैनेजर प्रवीण सैनी का कहना है कि जिला अस्पताल में खड़ी मात्र एक एंबुलेंस की ऑक्सीजन में दिक्कत आई हुई है। ऑक्सीजन सप्लाई में दिक्कत होने के कारण ऑक्सीजन की खपत ज्यादा है। इस संदर्भ में उन्होंने इंजीनियर से संपर्क किया हुआ है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में ईएमटी हैं, अगर जरूरत पड़ती है तो घटनास्थल पर ईएमटी वाली एंबुलेंस भेजी जाती है। कहा कि उन्होंने सभी एंबुलेंस के अग्निशमन यंत्र रिफिल होने के लिए भेजे हुए हैं, जो शीघ्र ही उपलब्ध होंगे।
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