कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद गीता अध्ययन केंद्र और गीता ज्ञान संस्थानम के बीच एक समझौता हुआ है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा की उपस्थिति में केयू के कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, फेकल्टी ऑफ इंडिक स्टडीज की डीन प्रो. शुचिस्मिता और श्रीमद्भगवद गीता अध्ययन केंद्र के प्रभारी प्रो. आरके देसवाल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। वहीं गीता ज्ञान संस्थानम की ओर से स्वामी ज्ञानानंद और जीआईओ गीता के संयुक्त सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता ग्रंथ में हर समस्या का समाधान है। गीता का संदेश पूरी दुनिया में विख्यात है। इसलिए तो भारत को विश्वगुरु जाना जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में समाहित आदर्श और संस्कार हमारी भावी पीढ़ी को भी पौराणिक दृष्टि से हर कदम पर कुछ नया देते हैं। गीता के आध्यात्मिक और पौराणिक सार जहां एक ओर हमारी संस्कृति को परिभाषित और प्रदर्शित करते हैं वहीं दूसरी और सामाजिक और नैतिक मूल्यों को सहेजते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। हमें गीता के श्लोकों को अंगीकृत करते हुए जीवन में अनुकरणीय बदलाव लाने की जरूरत है। हरियाणा सरकार द्वारा गीता के श्लोकों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। विद्यार्थियों के लिए गीता बहुत उपयोगी है इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर यह एमओयू किया गया है ताकि गीता का ज्ञान सभी विद्यार्थियों को मिल सके।
इस मौके पर कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य विविध क्षेत्रों से श्रीमद्भगवद गीता के विद्वानों और गीता में रुचि रखने वालों के लिए एक मंच प्रदान करना है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी ने गीता शोध पर आधारित इस एमओयू के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से यह शोध दोनों संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा व इससे क्या-क्या शैक्षणिक व सामाजिक लाभ होंगे। केंद्र के प्रभारी प्रो. आरके देसवाल ने बताया कि दोनों ओर से गतिविधियों के समन्वय के लिए दोनों पार्टी अपने स्टाफ के रूप में एक सदस्य को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करेंगी तथा यह समझौता ज्ञापन तीन साल की अवधि के लिए किया गया और आपसी सहमति से इसे नवीनीकृत किया जा सकता है। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी, डीन इंडिक स्टडीज प्रो. शुचिस्मिता, लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. ब्रजेश साहनी, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, उप-निदेशक डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. रामचंद्र, केडीबी सदस्य विजय नरूला, कुलपति के ओएसडी पवन रोहिल्ला व आनंद आदि मौजूद रहे।