थीम पार्क में शुक्रवार को मंत्रोच्चार के बीच अरणी मंथन से यज्ञ कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित करने के साथ ही लक्षचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हो गया। सुबह 10 यज्ञ सम्राट स्वामी हरिओम की अगुवाई में 501 ब्राह्मणों ने बांस से निर्मित यज्ञशाला में 501 यज्ञ कुंड का पूजन किया। तत्पश्चात सभी ने चार बार यज्ञशाला की परिक्रमा करके प्रधान यज्ञ कुंड में आहुतियां डाली। इससे पहले सुबह 5 बजे 501 ब्राह्मणों ने दुर्गा सप्तशती का तीन हजार पाठ करके यज्ञ के संपूर्ण होने की मंगल कामना की। पहले दिन यज्ञ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हरियाणा प्रांत संघ संचालक पवन जिंदल व सीएम के राजनैतिक सचिव कृष्ण बेदी मुख्यातिथि व मुख्य यज्ञमान के रूप में पहुंचे। यहां बता दें मां मोक्षदायिनी गंगा धाम ट्रस्ट ऋषिकेश (हरिद्वार) की ओर से 501 कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ का आयोजन थीम पार्क में किया जा रहा है। इस यज्ञ का उद्देश्य सामाजिक समरसता व पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ विश्व को यज्ञ की महत्ता बताना है।
पहले दिन महायज्ञ में आरएसएस से पवन जिंदल, बहादुरगढ़ के पूर्व विधायक रमेश दलाल, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा सहित सैकड़ों यजमानों ने यज्ञ में आहुतियां डाली। वहीं शाम को 7 बजे से 9 बजे तक मां त्रिपुरेश्वरी की महाआरती की गई। यज्ञ से मनुष्य व पर्यावरण पर पड़ने प्रभाव पर शोध करने के लिए सात देश के वैज्ञानिक भी पहुंचे है।
यज्ञ सम्राट स्वामी हरिओम ने कहा कि यज्ञ से मनुष्य का जीवन मंगलमय बनता है। संक्रामक रोग नष्ट होते हैं तथा शत्रु पर विजय प्राप्त की जाती है। प्रत्येक असंभव कार्य भी संभव होते हैं। यज्ञ से ही मनुष्य आरोग्य, विद्या, कीर्ति और यश प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से कोरोना व अकाल महामारी से मुक्ति के लिए लक्षचंडी यज्ञ सर्वोत्तम व सरल उपाय है। इस यज्ञ कर्म यज्ञ है। कोरोना महामारी को देखते हुए सभी को कर्म करने की आवश्यकता है। यह यज्ञ सर्व समाज कुंभ है। इसमें कोई भी सम्मिलित हो सकता है। केवल उसे यज्ञ के नियमों को धारण करना होगा। इस अवसर पर महामंडलेश्वर विकास दास मोहड़ा धाम, स्वामी रोशनपुरी, एडवोकेट राहुल तंवर सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
स्वामी हरिओम ने बताया कि यज्ञ के बाद शाम 5 बजे से 7 बजे तक विभिन्न अखाड़ों से आए महामंडलेश्वर प्रवचन करेंगे, लेकिन विशेष रूप से 25 से 27 अक्तूबर तक संत सम्मेलन रखा गया है। इस संत सम्मेलन के माध्यम से विश्व को यज्ञ से पड़ने वाले प्रभाव व महता को विश्व तक पहुंचाना है ताकि वह लोग भी यज्ञ में आहुतियां डाल सकें। इसी भावना व विचार के साथ यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।