धर्म और आस्था के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध धर्मनगरी के सन्निहित सरोवर में एकबार फिर हजारों मछलियों की मौत हो गई। इस कारण श्रद्धालु सरोवर के जल से आचमन भी नहीं कर सके। कारण कि उन्हें डर था कि मृत मछलियों के कारण उन्हें कोई बीमारी न लग जाए। मामले में मत्स्य विभाग ने जल के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। विदित हो कि इससे पहले ब्रह्मसरोवर में भी मछलियों के मरने की घटना सामने आ चुकी है।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) की ओर से सन्निहित सरोवर पर तीर्थाटन बढ़ाने के लिए उसके जीर्णोद्धार का दावा किया जा रहा है। हाल ही में केडीबी ने सन्निहित सरोवर पर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पिंडदान करवाने के लिए व्यवस्था बनाने का दावा किया था, मगर असलियत में केडीबी का सन्निहित सरोवर के हालात पर कोई ध्यान नहीं है। इससे पुरोहित वर्ग में केडीबी के खिलाफ रोष पनप रहा है।
पुरोहित वर्ग का आरोप है कि केडीबी प्रशासन द्वारा सन्निहित सरोवर की अनदेखी की जा रही है। हर अमावस पर यहां दूर-दराज से हजारों और प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पिंडदान, गति कर्म और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, मगर सरोवर में रेलिंग तक ही जल है, जो कि दूषित हो चुका है।
स्थिति यह है कि प्रतिदिन कोई न कोई श्रद्धालु घाट पर गिरकर जख्मी हो रहा है, क्योंकि घाटों पर फिसलन है। ऐसे में अब हजारों मछलियों की मौत से एकबार फिर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मछलियों की मौत किन कारणों से हुई, इसका अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है। हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है कि सरोवर में इतनी बड़ी तादाद में मछलियों की मौत हुई हो। इस तरह की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं।
मछलियों की मौत के बाद बिना साफ-सफाई ही भरा जाने लगा जल
सन्निहित सरोवर पर महर्षि दधीचि की मूर्ति लगाने के लिए कुछ दिनों पहले ही सरोवर से जल निकाला गया था। इस दौरान सरोवर की साफ-सफाई के बाद दोबारा जल भरा जाना था, मगर मछलियों की मौत की घटना के बाद बगैर साफ-सफाई किए ही सरोवर में जल भरने का काम शुरू कर दिया गया।
ऑक्सीजन की कमी से हुई घटना : पवन शर्मा
तीर्थ पुरोहित पवन शर्मा ने बताया कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण तीर्थ के जल की निकासी न होना है। इसकी वजह से पानी में ठहराव बना रहता है। पानी एक ही जगह पर जमा होने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण ही मछलियां मर रही हैं।
घटना के
बाद जागा केडीबी
पुरोहित वर्ग का कहना है कि सरोवर में मछलियों के मरने की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले कई घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद केडीबी प्रशासन चूने का छिड़काव करके भूल जाता है। अगर यह सब पहले ही कर लिया जाए तो शायद मछलियां न मरें। घटना हो जाने के बाद ही केडीबी को दवाओं का छिड़काव करना याद आता है।
घटना की जांच के लिए दिए आदेश, सैंपल भी लिए : अखिल पिलानी
केडीबी के सीईओ एवं एडीसी अखिल पिलानी ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सरोवर के जल के सैंपल लिए हैं। साथ ही सरोवर में ऑक्सीजन की कमी की भी जांच की जा रही है। सरोवर से मृत मछलियों को निकालकर चूना डाला गया है।