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मनरेगा में 96.48 लाख की मजदूरी अटकी

Sat, 22 Mar 2014 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में अगस्त 2013 से फरवरी 2014 तक करवाए गए कामों की मजदूरी अटकी है।
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जिलेभर में मजदूरों का 96.48 लाख रुपये का भुगतान बकाया है। यह हाल एक-दो खंडों में नहीं, जिलेभर के ब्लॉकों का है।

थानेसर, शाहाबाद, पिहोवा, बाबैन, लाडवा और इस्माईलाबाद में लाखों का भुगतान नहीं किया गया। मजदूर महीनों से भुगतान की बाट जोह रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की योजना में हजारों मजदूरों का भुगतान रुकने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

थानेसर ब्लॉक में सबसे अधिक 45 लाख 78 हजार रुपये का भुगतान बकाया है, जबकि सबसे कम बाबैन खंड में 3 लाख 72 हजार रुपये है।

मनरेगा लोकपाल श्यामलाल जांगड़ा ने ग्रामीण विकास विभाग हरियाणा चंडीगढ़ के निदेशक, परियोजना अधिकारी मनरेगा ग्रामीण विकास विभाग हरियाणा चंडीगढ़, एडीसी-कम-अतिरिक्त जिला कार्यक्रम संयोजक मनरेगा कुरुक्षेत्र और परियोजना अधिकारी मनरेगा डीआरडीए कुरुक्षेत्र को नोटिस भेजकर मजदूरी राशि बकाया होने की जानकारी दी है।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में लोकपाल ने बताया कि इस लापरवाही से अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्होंने इससे जुड़ी सभी रिपोर्ट अपने कार्यालय कुरुक्षेत्र में मंगवाई है।

मजदूरी में विलंब एक्ट का उल्लंघन
मनरेगा लोकपाल श्यामलाल जांगड़ा ने बताया कि मनरेगा स्कीम और संविधान के अनुच्छेद (21) व (41) की व्याख्या के अनुरूप राष्ट्रीय रोजगार अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्रतिवर्ष 100 दिन का रोजगार प्राप्त करने के अधिकार की गारंटी देना है।
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मनरेगा स्कीम में उत्पन्न अनियमितताओं और मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में विलंब मनरेगा एक्ट 2005 की उपधारा 9.1.6 का उल्लंघन है।

बकाया भुगतान का ब्योरा
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स्थान            राशि
थानेसर        45.78
शाहाबाद         3.43
पिहोवा        14.01
इस्माईलाबाद        22.52
बाबैन             3.72
लाडवा         7.02
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कुल राशि        96.48

25 को रिपोर्ट सहित पेश होने को कहा
मनरेगा लोकपाल श्यामलाल जांगड़ा ने कहा कि परियोजना अधिकारी को संबंधित रिकार्ड और तत्कालीन रिपोर्ट के साथ 25 मार्च को कुरुक्षेत्र कार्यालय में पेश होने को कहा गया है।

क्या है मनरेगा योजना
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में साल में 100 दिन तक काम दिया जाता है। इसके लिए सरकार मजदूरोें को 214 रुपये प्रतिदिन मजदूरी भुगतान करती है।
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