गुरुकुल कुरुक्षेत्र में शून्य लागत प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन शनिवार को किसानों ने सामूहिक रूप से हवन और मंत्रोच्चारण के कार्यक्रम की शुरुआत की।
शिविर में अमरावती महाराष्ट्र के कृषि वैज्ञानिक सुभाष पालेकर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से ही किसान महान बन सकते हैं।
प्राकृतिक खेती मानव जीवन के लिए उपयोगी और हितकारी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि अपनाकर किसान एक देसी गाय के गोबर व मूत्र से 25 एकड़ भूमि में बिना किसी अतिरिक्त खर्च के खेती कर सकते हैं।
एक अंग्रेजी नस्ल की गाय के गोबर में 78 लाख जीवाणु होते हैं, जबकि देसी गाय के गोबर में जीवाणुओं की संख्या तीन करोड़ तक होती है।
यदि भैंस के गोबर का मूल्यांकन किया जाए, तो उसके गोबर में जीवाणुओं की संख्या बहुत कम होती है। उन्होंने कहा कि देसी गाय के गोबर से बड़ी चीज इस संसार में नहीं है।
इसमें भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ रोगों के निवारण की भी अपार शक्ति है। गाय के गोबर से निर्मित खाद में कृषि में सहायक जीवांश विद्यामान रहते हैं।
यदि किसान देसी गाय का पालन कृषि के साथ करेंगे, तो वे अतिरिक्त आय प्राप्त करने के साथ-साथ जीवन में सुखी रहेंगे और कर्ज के बोझ से भी मुक्त होंगे।
यदि हम भैंस के गोबर में गाय का गोबर मिलाकर जैविक खाद तैयार कर खेती करेंगे तो सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। प्राकृतिक खेती में न तो रासायनिक खाद की जरूरत है और न ही कीटनाशक दवाओं की।
पालेकर ने कहा कि रासायनिक खादों के दामों में दिन-प्रतिदिन वृद्धि होने से किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। उन्हें शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राचार्य डॉ. देवव्रत प्राचार्य ने कहा कि किसान कृषि को लाभदायक बनाने के लिए उत्पादन को बढ़ाए और लागत खर्च को कम करें ताकि वे समृद्ध व आत्मनिर्भर बन सकें।
इस मौके पर गुरुकुल प्रबंध समिति के अध्यक्ष कुलवंत सिंह सैनी, उप-प्राचार्य शमशेर सिंह सांगवान, किशन जाखड़, डॉ. श्यामलाल शर्मा, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, नंद किशोर आर्य के अतिरिक्त कई कृषि अधिकारी और किसान उपस्थित थे।