कुरुक्षेत्र। गीता महोत्सव में नगाड़े व बीन की प्रस्तुति देते हरियाणवी कलाकार। आयोजक
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में लोक कलाकारों की प्रस्तुति व उनके वाद्य यंत्रों की धुनों से पवित्र ब्रह्मसरोवर की फिजा बदल रही है। कहीं नगाड़ा बज रहा है तो कहीं बीन व सारंगी की धुन लोक कला का रस घोल रही है।
शुक्रवार को भी लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से ब्रह्मसरोवर के तट व घाट गूंजते रहे। कलाकारों के साथ पर्यटक भी झूमते नजर आए। पर्यटक कलाकारों के साथ सेल्फी भी लेते दिखाई दिए। कहीं जंगम-जोगी, कहीं नगाड़ा-बीन और कहीं सारंगी ने पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
जंगम-जोगी, डेरू, नगाड़ा, बीन पार्टी कलाकारों की प्रस्तुतियों से पवित्र ब्रह्मसरोवर कलाओं का संगम बना रहा जिससे पर्यटक भावविभोर हो उठे। पर्यटकों ने इन लोक कलाओं का आनंद लेने के साथ जमकर खरीदारी भी की। यही नहीं पर्यटकों में ब्रह्मसरोवर के अलग-अलग घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सेल्फी लेने, वीडियो बनाने व सोशल मीडिया पर अपलोड करने का भी उत्साह देखा गया। ऐसे में महोत्सव न केवल विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को बचाने का काम कर रहा है बल्कि युवा वर्ग में खास रोमांच भी जगा रहा है।
शिल्प व सरस मेले में दिखाई दे रही महिलाओं की आत्मनिर्भरता की झलक
महोत्सव में देश के विभिन्न प्रदेशों से आए शिल्पकारों एवं विभिन्न प्रकार के व्यवसाय करने वाले व्यक्तियों ने शिल्प व सरस मेला में विभिन्न प्रकार के सामान के स्टॉल लगाए हुए हैं। महिला विकास निगम की ओर से संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से भी अपनी कारीगरी प्रदर्शित की गई है। ऊनी वस्त्र, सजावटी सामान सहित लकड़ी के बने घरेलू उत्पाद रखे गए हैं। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता व स्वावलंबी होने की तस्वीर सामने आई है। शिल्पकार महिलाएं बेहद उत्साहित हैं और उनकी कारीगरी को पर्यटक भी जमकर पसंद कर रहे हैं। ऐसे में इन शिल्पकारों का कारोबार भी बेहतर हो रहा है। इससे शिल्पकारों के चेहरे भी खिले हुए हैं। शनिवार व रविवार को पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।