रात साढ़े 10 बजे तक एचएसजीएमसी के पदाधिकारी एवं समर्थक मोर्चा लगाकर छठी पातशाही के समीप कुरुक्षेत्र-कैथल मार्ग पर डटे रहे।
हालांकि इस बीच कुरुक्षेत्र के सर्कट हाउस में करनाल रेंज के आईजी एसएस देसवाल, डीसी निखिल गजराज एवं एसपी अश्विनी शैणवी ने दोनों ग्रुपों से अलग-अलग वार्ता की। लेकिन जिस मकसद से इन्हें यहां बुलाया गया था। वह पूरा नहीं हुआ और ये वार्ता बेनतीजा रही।
इस मौके पर एसएचजीएमसी के अध्यक्ष झींडा सहित छह पदाधिकारियों का शिष्टमंडल शामिल रहा। वहीं एसजीपीसी अमृतसर की ओर से सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा से भी बात हुई।
उन्होंने दो टूक ये कह कर आईजी को इस मामले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया कि ये मामला अकाल तख्त का है। वहां से निष्काषित झींडा-नलवी पहले वहां से निर्णय लें, उसके बाद आगे की बात होगी।
त्रिलोकेवाला के ऐलान पर झींडा-नलवी ने बदले सुर
मेन रोड पर लगाए गए मोरचे पर संगत रहेगी या नहीं, इसको लेकर मोरचा स्थल पर ही 11 सदस्यीय बैठक हुई,लेकिन लंबी बैठक के बीच ही आक्रामक तेवरों के साथ एसजीपीसी के सदस्य एवं एचएसजीएमसी के एक्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर गुरमीत सिंह त्रिलोके वाला ने ऐलान किया कि गुरुद्वारे के समक्ष मोरचा जारी रहेगा।
इसके लिए चाहे उन्हें कितनी बड़ी शहीदी क्यों न देनी पड़े। त्रिलोके वाला अपनी कमेटी के पदाधिकारियों पर बरसते हुए देर रात को हुई बैठक से बायकाट कर उठ खड़े हुए।
हालांकि डीएसपी मुख्यालय सतीश गौतम एवं पिहोवा के डीएसपी गौरखपाल उन्हें मोरचा हटाने की अपील करते रहे,लेकिन संगठन में असंतोष को देखते हुए साढ़े 10 बजे झींडा और नलवी को मोरचा जारी रखने की घोषणा करनी पड़ी। गौरतलब है कि झींडा-नलवी पूरी तरह मोरचा जारी रखने को लेकर सहमत नहीं थे।