कुत्ते के काटने से ही नहीं, बल्कि बिल्ली, बंदर, सियार व लोमड़ी के काटने से भी रेबीज हो सकता है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। कई बार कटे अंग पर पालतू जानवर के चाटने या खून का जानवर के लार से सीधे संपर्क से भी ये रोग फैल सकता है। यह कहना है एलएनजेपी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. कृष्ण लाल का। उन्होंने विश्व रेबीज दिवस पर विशेष बातचीत में बताया कि कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने पर ज्यादातर मरीज काटे हुए जख्म पर मिर्च बांध लेते हैं या फिर घाव अधिक होने पर टांके लगवा लेते हैं, जो ठीक नहीं है। पीड़ित द्वारा इलाज में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही मौत का कारण बनती है, क्योंकि रेबीज फैलने से मौत संभव है। 72 घंटे से पहले एंटी रेबीज टीकाकरण अवश्य कराएं। अगर वैक्सीनेशन नहीं कराया तो उसके लक्षण दस साल बाद भी आ सकते हैं। डॉ. कृष्ण लाल ने बताया कि सरकार एंटी रेबीज टीकाकरण पर सालाना लाखों रुपये खर्च करती है। उन्होंने बताया कि रेबीज वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंचकर दिमाग में सूजन पैदा करते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति या तो जल्द कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है। कुछ लोगों को लकवा भी हो सकता है। यह वायरस, मानव त्वचा या मांसपेशियों के संपर्क में आने के बाद रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क की ओर चला जाता है। वायरस के मस्तिष्क में पहुंचने के बाद लक्षण और संकेत संक्रमित दिखाई देने लगते हैं। इस मौके पर डॉ. कृष्ण लाल के साथ इंटर्न डॉ. प्रिंयका भी उपस्थित थी।
बता दें कि वर्ष 2019 में पिहोवा वासी एक व्यक्ति की रेबीज फैलने के कारण उपचार के दौरान मौत हो गई थी। जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुत्ते और बंदरों के काटने से घायल 25 से 30 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल, सीएचसी सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी टीके लगाने की सुविधा दी गई है।
रेबीज एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। रेबीज एक जानलेवा रोग है, जिसके लक्षण बहुत देर में नजर आते हैं। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, जो यह रोग जानलेवा साबित हो जाता है।
बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता और व्याकुलता, भ्रम की स्थिति, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, अनिद्रा, एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाना आदि।