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देख ली मैंने ये दुनिया, अपने गांव की गली अच्छी लगी...

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डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल संस्थान की काव्य गोष्ठी में हिस्सा लेते कवि। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल संस्थान की ओर से कैलाश नगर स्थित सेमिनार हॉल में रविवार को काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें 20 से अधिक कवियों ने शिरकत कर अपनी रचनाएं पढ़ीं। इस दौरान उल्फत ने ‘देख ली मैंने यह दुनिया देख ली, अपने गांव की गली अच्छी लगी’ रचना से देश-दुनिया में हो रहे बदलाव के संबंध में अपने विचार रखे।
कवि मनजीत भोला ने सुनाया कि ‘संगदिल वो पानियों की धार से वाकिफ नहीं, किस तरह दिल में रहेगा प्यार से वाकिफ नहीं ’ देवेंद्र बीबीपुरिया ‘मेहरम’ ने ‘अरे वो शख्स भी कितने गजब की बात करता है, मशीनी दौर में देखो अदब की बात करता है’ सुनाकर श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। इनके बाद दीपक मासूम ने ‘जुल्म की आंधी हवा लाचार चलती है, अब सहारे झूठ के सरकार चलती है’ रचना सुनाई। दीपक वोहरा ने ‘अब आर है या पार है, बस इंकलाब ही दरकार है। उन्हें यदि है अंधेरे का, हमें उजाले का इंतजार है’। जयपाल ने ‘हिंदू मारा गया मुस्लिम हंसता रहा, मुस्लिम मारा गया हिंदू हंसता रहा। हंसी-हंसी में दोनों मारे गए’।
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अशोक भाटिया ने ‘आग उतनी बची जितनी मनुष्य के भीतर रह गई। पानी उतना बचा जितना, मनुष्य की आंखों में बचा रहा’। हरियाणवी कवि कर्म चंद्र ‘केसर’ ने ‘जे यारां नैं किनारा करया ना होंदा, बेमौत वा बचारया मरया ना होंदा’। मेहरू ने मन्नै बैरी भी उसदिन नेड़े देक्खे, जब अपणे भी कुंडा सांकल भेड़े देक्खे.. रचना प्रस्तुत की।
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इसके अलावा डॉ.बृजेश कठिल, डॉ. राम कुमार, डॉ प्रदीप, विकास शर्मा, डॉ. कृष्ण बनवाला, बलदेव मेहरोक, अंबर थानेसरी, डॉ. जीवन बख्शी, बीर सिंह, खान मनजीत भावड़िया मजीद,हरपाल, करुणेश व कपिल भारद्वाज ने भी कविताएं सुनाई। इस दौरान जयपाल, ओमप्रकाश करुणेश, डॉ. अशोक भाटिया व डॉ. रविंद्र गासो ने हरपाल के नव प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘औरतें पैदा नहीं होतीं’ और उल्फत जी के गजल संग्रह ‘शाम-ए-गजल’ का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश ‘उल्फत’ व समकालीन कविता के प्रमुख हस्ताक्षर बृजेश कठिल ने की।
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