सरकार द्वारा मांगें नहीं मानने पर सांझा मोर्चा के आह्वान पर नारनौल डिपो के चालक व परिचालकों ने बसों का चक्का जाम कर दिया। बुधवार सुबह से यूनियन के पदाधिकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष व्यक्त कर रहे हैं। नारनौल डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने बताया कि सरकार द्वारा सांझे मोर्चे को 11 जनवरी, 10 मार्च, 23 जून, 13 दिसम्बर को कर्मचारियों की मांगों समाधान के लिए बैठकों के लिए आमंत्रित किया गया था।
सांझे मोर्चे ने कर्मचारियों की मांगों के समाधान बारे तर्क व प्रमाण दिए गए। लेकिन इसके बाद भी सरकार की तरफ से मांगों को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में 24 जनवरी को प्रदेश भर में बसों का चक्का जाम करने का निर्णय लिया गया है। इसी कड़ी में नारनौल डिपो में भी सभी चालक, परिचालकों व वर्कशॉप कर्मचारियों ने हड़ताल को पूर्ण रूप से समर्थन दिया है।
लंबे रूट पर सफर करने वाले यात्री हुए परेशान
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से लंबे रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसमें दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़, झुंझुनूं सहित अनेक रूट पर यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।
डिपो के बाहर धरने पर बैठे कर्मचारी
नारनौल डिपो के बाहर सुबह से चालक परिचालक सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। ठंड के बीच अपनी मांगों को लेकर सुबह से धरने पर बैठे हुए हैं। हालांकि सुबह हड़ताल के बीच दो-तीन बसें विभिन्न रूटों पर रवाना हुई है।
सांझा मोर्चा की मुख्य मांगें
- हिट एंड रन कानून रद्द की मांग
- अवकाश कटौती पत्र वापस लिया जाए
- परिचालक व चालक की वेतन विसंगति दूर की जाए
- 2002 से चालको को नियुक्ति तिथि से पक्का करके पुरानी पेंशन नीति में शामिल किया जाए
- 2016 के चालक व 52 दादरी के हेल्परों को पक्का करने की पॉलिसी बनाई जाए
- चालक व परिचालकों से आठ घंटे की ड्यूटी ली जाए और आठ घंटे ड्यूटी से अधिक ड्यूटी को ओवरटाइम दिया जाए
- चालकों को अड्डा इंचार्ज के पद पर प्रमोशन की जाए