गीता जयंती पर शनिवार को दुनिया के कोने-कोने में गीता का संदेश गूंजा। गीता उपदेश स्थली कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में गीता जयंती के अवसर पर प्रदेश भर के 18 हजार स्कूली बच्चों ने सामूहिक रूप से वैश्विक गीता पाठ किया। वहीं प्रदेश भर के एक लाख से ज्यादा विद्यार्थी ऑनलाइन गीता पाठ से जुड़े।
यहीं नहीं करीब 23 राज्यों में एक साथ एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने गीता पाठ किया। हरकी पैड़ी हरिद्वार, श्री राम जन्मभूमि अयोध्या, मां वैष्णो देवी दरबार सहित देश के कई बड़े धार्मिक स्थानों पर भी यह पाठ किया गया तो वहीं करीब 900 विश्वविद्यालय और अन्य संस्थान भी इससे जुड़े।
थीम पार्क में ठीक 11 बजे एक मिनट एक साथ गीता पाठ किया गया। वहीं 12 बजे वैश्विक गीता पाठ का आयोजन किया गया। इससे हर तरफ जहां अध्यात्म की धारा बही, वहीं धर्मनगरी की पूरी फिजा ही गीतामयी हो उठी। समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, आरएसएस सदस्य इंद्रेश, विधायक सुभाष सुधा, स्वामी आत्मानंद, पंजाब के संत भूपिंद्र सिंह, पीयूष मुनि जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल रहे।
वहीं हरियाणा और असम के मुख्यमंत्रियों ने थीम पार्क में वैश्विक गीता पाठ के बाद गीता जयंती पर गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ पर चल रहे यज्ञ में पूर्णाहुति डाली और विश्व शांति के लिए पूजा की। इसके उपरांत पवित्र ग्रंथ गीता का पूजन किया और जिस वट वृक्ष के नीचे हजारों वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मोह भंग करने के लिए उपदेश दिए थे उस वटवृक्ष को भी देखा।
गीता संदेश के जरिये हम हर चुनौती का डटकर करेंगे सामना : मनोहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गीता के संदेश के जरिये ही हम हर चुनौती का डटकर सामना करेंगे। उन्होंने अपनी जेब से गीता निकालकर दिखाते हुए कहा कि हम सभी को अपने साथ गीता रखनी चाहिए। ऐसा वातावरण बनने से हम सकारात्मकता की ओर जाते हुए हर बाधा को पार कर जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं महसूस करता हूं कि कर्म करते रहो, फल की चिंता न करो। यही गीता का संदेश है और इसी पर मैं चल रहा हूं। हर किसी को इसी सिद्वांत पर चलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विषम परिस्थितियों में दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजर से देखती है। देश ने कोरोना काल में इसे साबित कर दिखाया था कि गीता में जो संदेश है, उसका पालन करते हुए हम मानवता के लिए हर कठिन समय में भी आगे बढ़कर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गीता संदेश को आज पूरा विश्व मानने को तैयार है। प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत छह से 12वीं कक्षा तक तीन ग्रुप में गीता संदेश से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें शुरू की हैं। इससे स्कूली जीवन से ही हमारे बच्चे गीता संदेश से आत्मसात रहेंगे और सफल जीवन की ओर आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने गीता पाठ में शामिल बच्चों का उत्साह देखते हुए मंगलवार को जिले में स्कूलों की छुट्टी का एलान किया।
केडीबी के 164 तीर्थों की पुस्तक का विमोचन, 18 नए जुड़ेंगे
मुख्यमंत्री ने तीर्थ सम्मेलन के दौरान एलान किया कि ब्रह्मसरोवर पर अगले गीता महोत्सव से पहले लाइट एंड साउंड स्थापित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने केडीबी के 164 तीर्थों की पुस्तक का विमोचन किया और इसमें 18 नए तीर्थ जोड़ने की बात कही। ऐसे में अब तीर्थों की संख्या 164 से बढ़कर 182 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जीटी रोड पर तीन एकड़ भूमि पर सिख संग्रहालय बनाया जाएगा। वहीं वैश्विक गीता पाठ के दौरान कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ही गीता और हमारे ग्रंथ स्कूल पाठ्यक्रम में जोड़ने का कार्य जारी है। इस साल गीता के 54 श्लोक पाठ्यक्रम में शामिल होंगे। इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।
महाभारत व रामायण काल से हरियाणा व असम का रिश्ता : डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हरियाणा और असम के बीच महाभारत तथा रामायण काल से ही रिश्ता रहा है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण दो बार आए और यहां से उन्होंने गीता का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने असम की बेटी रुक्मिणी से विवाह किया और इस नाते वे असम के दामाद रहे हैं।
यहीं नहीं महाभारत के समय कुरुक्षेत्र में पूरे भारत का संगम हुआ और उस दौरान भी असम के महान योद्धा भगदत ने अपना पराक्रम यहां आकर दिखाया था, हालांकि भगदत कौरवों की ओर से लड़े थे, लेकिन उनके पराक्रम से हर कोई वाकिफ है। यहीं नहीं अर्जुन का संबंध भी असम के पड़ोसी मणिपुर से रहा है। उन्होंने कहा कि भारत 1947 में नहीं बना, बल्कि यह महाभारत व रामायण काल से ही बना है। हमारे संविधान का मूल आधार वेद पुराणों में ही है, जिसके चलते धर्मनिरपेक्ष संविधान रहा है, जबकि पाकिस्तान का मूल आधार इस्लाम रहा है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश पूरी मानव जाति के लिए आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वे भी स्कूली बच्चों को गीता का संदेश पढ़ाएंगे।