ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने शिक्षण संस्थानों को खोलने पर अभी कोई मंथन नहीं किया है। वहीं
एनएसयूआई, एसएफआई, डीएसएफआई और दिशा सहित कई छात्र संगठनों ने शिक्षण संस्थान खोलने के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को भी संयुक्त छात्र संगठन के बैनर तले छात्र नेताओं ने रोष मार्च निकाला। बूंदाबांदी के दौरान छात्र नेता नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर उन्होंने यहां स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस खोलने के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके बाद छात्र संगठनों ने नगराधीश चंद्रकांत कटारिया को मांग-पत्र सौंपा। इस दौरान छात्र संगठनों ने कहा कि जब चुनावी रैलियां और कार्यकम किए जा सकते हैं और रात 10 बजे तक शराब के ठेके खोले जा सकते हैं तो शिक्षण संस्थान क्यों नहीं ?
एसएफआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद गिल ने कहा कि पांच राज्यों में चुनावी रैलियां कराई जा रही है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हैं। गिल ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल, कॉलेज आदि शिक्षण संस्थान सबसे बाद में बंद किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य खराब न हो। वहीं यहां सबसे पहले शिक्षण संस्थान पर ही ताले लगाए जा रहे हैं। प्रदीप ने कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऑनलाइन कक्षाओं में सही पढ़ाई न होने के कारण विद्यार्थी मानसिक दबाव झेल रहे हैं। विद्यार्थियों के हित के लिए ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होनी चाहिए। एनएसयूआई से शुभम ने कहा कि पिछले दो साल से शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है। सरकार ने पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू कराने की बजाय शिक्षण संस्थानों पर फिर ताले लगा दिए हैं। इस मौके पर रोकी राणा, अनिल, गुरदीप, गगन रोनी, मंदीप बराड़, भारत, नीलम, रेखा, निखिल व गुरमेल, डीएसएफआई से प्रदीप, संविधान बचाओ मोर्चा से कृष्ण व दिशा छात्र संगठन से अजय सहित अन्य मौजूद रहे।