करीब डेढ़ साल बाद सोमवार को कक्षा पहली से तीसरी तक के स्कूल खुल गए हैं। सोमवार को पहले दिन जिले के 483 स्कूलों में 68 फीसदी बच्चे स्कूल पहुंचे। शिक्षकों की मानें तो डेढ़ साल घरों में रहने के बाद छोटे बच्चे अब लिखना पढ़ना भूल गए हैं। ऐसे में बच्चों के साथ ही अब शिक्षकों को भी कड़ी मेहनत करनी होगी।
कोरोना संक्रमण के कारण डेढ़ साल से प्राइमरी स्कूल बंद थे। अभी कोरोना का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है, लेकिन पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए सरकार ने पहली से तीसरी तक के स्कूल भी खोल दिए हैं। अब शिक्षकों के समक्ष बच्चों को संक्रमण से बचाने के साथ ही फिर से उन्हें सिखाने-पढ़ाने की चुनौती होगी। प्राइमरी शिक्षकों के अनुसार सोमवार को जब शिक्षक बच्चों से क्लास रूम में रूबरू हुए तो ज्यादातर बच्चे अक्षरों की पहचान करना भी भूल गए। यही नहीं, पहले जो कविताएं, कहानियां, गिनती और पहाड़े याद कराए गए थे, बच्चे सब भूल गए।
विदित हो कि जिले के 483 प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से तीसरी तक के 21 हजार 225 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से 50 फीसदी यानी 10 हजार 612 बच्चों को स्कूल में बुलाया गया था, लेकिन इनमें से सात हजार 222 बच्चे स्कूल पहुंचे। स्कूल खुलने के पहले दिन बच्चों और अभिभावकों में उत्साह दिखाई दिया। क्लास में एक डेस्क पर एक ही बच्चे को बैठाया गया। कोरोना की गाइडलाइन के चलते बच्चों को एक दूसरे के साथ सामान बांटने पर पाबंदी लगाई गई है।
53 बच्चों को स्कूल से लौटाया
पहले दिन स्कूलों में मुख्यद्वार पर बच्चों को जहां सैनिटाइज कराया गया, वहीं थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जिले में जांच के दौरान 53 बच्चों का तापमान 99 डिग्री मिला, जिन्हें वापस घर भेज दिया गया।
यहां एक भी बच्चा नहीं पहुंचा स्कूल
राजकीय प्राथमिक पाठशाला थानेसर में पहले दिन कक्षा पहली में कोई बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा। इस कक्षा में कुल 32 छात्र हैं। कक्षा दूसरी के 44 बच्चों में से मात्र दो ही स्कूल पहुंचे। कक्षा तीसरी के 40 में से 7 छात्र स्कूल में आए।
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स्कूल आकर अच्छा लगा : नमन
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दूसरी कक्षा के छात्र नमन ने बताया कि उन्हें स्कूल में आकर काफी अच्छा लग रहा है, क्योंकि वे घर में कैद हो गए थे। मम्मी-पापा घर से बाहर नहीं निकलने देते थे। नमन इसलिए भी खुश था कि उन्हें अपने दोस्तों के साथ पढ़ाई और खेलने का मौका मिला है।
मोबाइल पर सीखी एबीसीडी: दिव्या
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दिव्या छात्रा दिव्या ने बताया कि उसने पहले मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई की। धीरे-धीरे माता-पिता की मदद से किताबों पर ए बी सी डी और गिनती लिखनी सीखी। अब स्कूल में टीचर से वह पढ़ना सीखेगी।
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बच्चों की संख्या पहले दिन रही कम: अंजना शर्मा
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राजकीय प्राथमिक स्कूल थानेसर की इंचार्ज अंजना शर्मा ने बताया कि पहले दिन स्कूल में बच्चों की संख्या कम रही, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ जाएगी। स्कूल में प्रवेश देने से पहले बच्चों को सैनिटाइज कराया गया। थर्मल स्क्रीनिंग की गई।
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तिलक एवं पुष्प से बच्चों का स्वागत
गीता निकेतन विद्या मंदिर स्कूल पहुंचे बच्चों को विद्यालय प्रबंधक गुलशन कुमार ग्रोवर व प्रधानाचार्य सुमित कुमार ने तिलक एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। प्रबंधक गुलशन कुमार ग्रोवर ने कहा कि बड़े हर्ष का अवसर है कि विद्यालय रूपी बगिया में नन्हे छात्रों रूपी फूलों का आगमन हुआ है।