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Kurukshetra News: केयू में इंडो-पैसिफिक सम्मेलन में ब्लू इकॉनमी पर जोर

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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में समुद्र, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हुआ। केयू कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि भौगोलिक दूरी बौद्धिक दूरी नहीं होती। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ समुद्री एवं क्षेत्रीय नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। केंद्र के निदेशक प्रो. वीएन अत्री ने ब्लू इकॉनमी के सतत विकास और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता बताई।
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प्रो. पाल ने चर्चा को भारत, हिंद महासागर, इंडो-पैसिफिक तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पहुंचने की बात कही। उन्होंने विभिन्न मंचों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं बताईं। आवश्यकता एक व्यवस्था को दूसरे का पूरक बनाने की है। प्रतिभागियों से पांच प्रमुख संकल्पों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। इनमें संवाद से सहयोग और आर्थिक विकास से सतत समृद्धि शामिल हैं।
प्रो. चार्ल्स कोलगन ने कहा कि ब्लू इकॉनमी पर पिछले करीब 15 वर्षों से चर्चा हो रही है। डॉ. बद्री नारायणन ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में जल संकट और सामुदायिक नवाचारों पर प्रकाश डाला। प्रो. जॉन विर्डिन ने औद्योगिक गतिविधियों से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव की बात कही। प्रो. एसके मोहंती ने ब्लू इकॉनमी को कृषि, पर्यटन और विनिर्माण सहित अनेक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा बताया। प्रो. भगवान सिंह चौधरी ने जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर सीधा असर बताया।
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