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पर्व भारतीय संस्कृति के प्राण : स्वामी ज्ञानानंद

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श्री कृष्ण गोशाला में आयोजित होली उत्सव में हिस्सा लेते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। जीओ गीता एवं श्री कृष्ण कृपा परिवार की ओर से श्री कृष्ण गोशाला में होली का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि पर्व हमारी भारतीय संस्कृति के प्राण हैं और वे हमें अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ते हैं। होली अहंकार के भाव खत्म कर प्यार के रंग चढ़ाने का पर्व है।
उन्होंने कहा कि होली के पावन पर्व पर दुर्भावना खत्म होकर सद्भावना के रंग चढ़ते हैं। होली विश्वास में उल्लास का पर्व है क्योंकि होलिका दहन के रूप में प्रहलाद का प्रभु पर अड़िग विश्वास विजयी हुआ व हिरण्यकश्यप व होलिका का अहंकार टूटा। कहा कि जीओ गीता का प्रयास रहता है कि होली हुड़दंग का रूप न ले। इसी के चलते अनेक नगरों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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ब्रज की दिव्यता को साथ लेकर इस होली उत्सव आयोजित किया जा रहा है। कहा कि समाज में असंतोष व्याप्त है। विश्व स्तर पर भी यूक्रेन और रूस के युद्ध से समूचा विश्व आशंकित है। बढ़ता अहम आज समाज व परिवारों को तोड़ रहा है। पारिवारिक दुर्भावना के कारण असंतोष बढ़ता जा रहा है। बढ़ते अहम को त्यागना ही इन समस्याओं का समाधान है।
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कार्यक्रम में फूलों की होली खेली गई। मुजफ्फरनगर के मशहूर गायक विजेंद्र शास्त्री ने अपने राधा-कृष्ण के भजनों से श्रद्धालुओं को नाचने को मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में थानेसर के विधायक सुभाष सुधा भी पहुंचे और उन्होंने ने भी फूलों की होली का आनंद उठाया।
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