कुरुक्षेत्र। जिला नागरिक अस्पताल की मॉलिक्यूलर लैब में अब मरीजों की हेपेटाइटिस संबंधी जांच हो रही है। जिले में हर साल 250 से 300 मरीज हेपेटाइटिस के शिकार मिल रहे हैं।
वहीं जिले में वर्तमान में हैपेटाइटस के 150 मरीज है। सोमवार को अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर अस्पताल पहुंचे मरीजों को जागरूक किया गया। अस्पताल में मरीजों की सहुलियत को देखते हुए हेपेटाइटिस बी व सी की जांच के लिए लैब खाली है। लैब में मरीजों की निशुल्क जांच हो रही है। लैब में पैथोलॉजिस्ट डॉ. विनोद तंवर कमान संभाल रहे हैं। इस बीमारी का मुख्य कारण संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल, संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने पर, बिना सही जांच के संक्रमित रक्त चढ़ाया गया हो, संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से, टैटू बनवाने, नाक-कान छिदवाना हैं
घातक है हैपेटाइटिस बी, सी की गंभीर स्थिति : वायरल हैपेटाइटिस नोडल अधिकारी डॉ. गौरव चावला ने बताया कि यह एक लक्षण रहित बीमारी है, जो ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक छिपी रहती है। लीवर में गंभीर संक्रमण होने के बाद ही इसके लक्षण दिखते हैं। इलाज मिलने से लीवर सिकुड़ जाता है। इस स्थिति को लीवर सिरोसिस कहते हैं। इसके अलावा मरीज को लीवर कैंसर भी हो सकता है। वहीं, क्रॉनिक हैपेटाइटिस सी में शरीर इस वायरस से मुक्त नहीं हो पाता और यह विषाणु शरीर में ही पालता रहता है। लीवर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। संवाद