कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से आयोजित 32वें आठ दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) अभिविन्यास एवं संवेदीकरण कार्यक्रम के छठे दिन शिक्षा क्षेत्र में नेतृत्व और शिक्षण की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ एजुकेशन की प्रो. अमिता पांडे भारद्वाज, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), नई दिल्ली ने शैक्षिक संस्थानों में प्रभावी नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि किसी भी शैक्षणिक वातावरण में नेतृत्व की प्रभावशीलता संस्थान की कार्य संस्कृति और शैक्षिक गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि सफल शैक्षणिक नेताओं की पहचान संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को प्रेरित करने की क्षमता, समावेशी व सहयोगात्मक वातावरण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता तथा संस्थागत चुनौतियों का कुशलतापूर्वक समाधान करने की योग्यता से होती है। उन्होंने परिवर्तनकारी, लेनदेन और सेवाभावी नेतृत्व शैलियों के माध्यम से अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। वहीं टीडीएल गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वीमेन, मुरथल (सोनीपत) की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति राज ने कौशल विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि कक्षाओं को गतिशील शिक्षण मंचों में बदला जाए, जहां शिक्षक केवल विषयवस्तु पढ़ाने तक सीमित न रहकर सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएं। इससे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल का विकास संभव हो सकेगा। कार्यक्रम का समापन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजू बाला द्वारा यूजीसी-एमएम-टीटीसी की निदेशक प्रो. प्रीति जैन का धन्यवाद कर किया गया।