संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में कांग्रेस भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक पंडित पवन भारद्वाज ने कहा कि कि श्रीकृष्ण के जन्म होते ही देवकी और वसुदेव के बंधन खुल गए और सब पहरेदार सो गए। उसके बाद वसुदेव कान्हा जी को गोकुल में नंद जी के घर छोड़कर आए।
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राक्षसों का संहार करने के लिए हुआ था। जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तब प्रभु श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। कथा को संगीतमय प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रोता झूम उठे।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार के बीच पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ उनका जन्मदिवस मनाया। कथा स्थल को विभिन्न प्रकार के रंगों के गुब्बारों से सजाया गया। भजनों के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा। मुख्य यजमान के रूप में डॉ. खुशबीर शर्मा व हेमंत गुप्ता रहे। इस अवसर पर सतीश शर्मा, भविष्य शर्मा, दीनानाथ शर्मा, नीतू शर्मा, कृतिका शर्मा, ऊषा गुप्ता, बीपी जिंदल, रघु शर्मा, अमन शर्मा, शंकर शर्मा, डॉ. महेश शर्मा, महेश आदि मौजूद रहे।