कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में उत्तराखंड की वॉल हैंगिंग पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इस वॉल हैंगिंग की कीमत 35 हजार रुपये है। इसके दो अलग-अलग रंग व डिजाइन भी उत्तराखंड से आए शिल्पकार के पास मौजूद है। इस वॉल हैंगिंग को बनाने में छह महीने से ज्यादा का समय लगा है। इसे किसी मशीन से नहीं बल्कि हाथ से बनाया गया है। इस पर तरह-तरह के डिजाइन बनाए गए हैं, जो बेहद ही बारिक व महीन कारीगरी की मिसाल है।
देहरादून से आई शिल्पकार रीता शर्मा ने बताया कि वह अपने भाई के साथ पिछले तीन साल से गीता महोत्सव में आ रही है। उनके पास उत्तराखंड की कुर्ती, बेडशीट, पर्स, दुपट्टा, कालीन, चटाई, फूटमेट सहित अन्य सामान उपलब्ध है। इस सामान के अलावा उनके पास छोटे व बड़े आकार की वॉल हैंगिंग भी है, जिसकी कीमत उन्होंने 35 हजार रुपये रखी है। हालांकि सूरजकुंड मेले में उन्होंने इस आकार की वॉल हैंगिंग को 60 हजार रुपये में बेचा था।
बताया कि इस वॉल हैंगिंग को कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में तैयार किया गया था, जिसे बनाने में छह महीने से ज्यादा का समय लग गया। इसमें दो से ढाई किलो गोल्डन, सिल्वर, रंग-बिरंगे धागों का इस्तेमाल किया है। इसका कुल वजन तीन किलो के आसपास है। दो महिलाओं ने दिन रात मेहनत करके इस वॉल हैंगिंग को बनाया है। उन महिलाओं ने छोटी सुई से इस पर डिजाइन बनाए हैं। इसके सभी कोनों व बीच में अलग-अलग तरह के डिजाइन बनाए गए हैं, जिसे उल्टा देखने पर भी वो सीधे ही दिखाई पड़ते हैं। धागा को इसमें इस तरह से बुना गया है कि मानो एक ही रील से बुनाई की गई है, जबकि ऐसा नहीं है। धागा के टूटने व रील के खत्म होने पर दूसरे धागा को ऐसे मर्ज किया गया है कि धागा का सिरा दिखाई न पड़े। इसके डिजाइन बेहद ही खास हैं, जो भी इसे देखता है इसकी ओर आकर्षित हो जाता है। इसके दो अलग डिजाइन व रंग उनके पास उपलब्ध हैं।
12 परिवार को दे रहीं रोजगार
रीता शर्मा ने बताया कि वह उत्तराखंड का लोक पहनावा कुर्ती खुद तैयार करती है। पहले वह स्वयं ही इस काम को करती थी, अब उन्होंने अपने साथ 12 महिलाओं को जोड़ा हुआ है। इससे उन महिलाओं को रोजगार मिल रहा है तथा उनको मेले में जाकर अपनी कला दिखाने का अवसर प्राप्त हो रहा है।