समय-समय पर महापुरुषों ने सही मार्ग दिखाया है, जो सभी के भलाई के लिए साबित हुआ है। सिख महापुरूषों ने भी बिना भेदभाव के समाज को बेहतर बनाने का संदेश दिया है। उन्हीं संदेश पर आज सरकार चल रही है और प्रदेश विकास की राह पर है। हर व्यक्ति को ऐसे महापुरुषों की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए समाज व देश के लिए तत्पर रहना चाहिए। यह आहवान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने व्यक्त किए।
बुधवार को कुवि ऑडिटोरियम में हरियाणा के सिखों की सेवा में खट्टर पुस्तक का विमोचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पंजाब से भी ज्यादा सिख महापुरूषों का आगमन रहा है। ऐसे सभी महापुरूषों की निशानियां हमें सरंक्षित करनी चाहिए, इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से पिपली में संग्रहालय स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए जमीन चिंहित कर ली गई है। पहले यह सग्रहालय अंबाला में बनाए जाने की योजना थी, लेकिन कुरुक्षेत्र में सिख महापरुषों के रहे ज्यादा आगमन और संगत को देखते हुए इसे यहां बनाए जाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लौहगढ़ में सिख महापुरूष बंदा बहादुर सिंह स्मारक बनाया जा रहा है, जहां देश-दुनिया उनकी बहादुरी से अवगत हो सकेगी। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अलग गुरुद्वारा प्रबंधन स्थाई कमेटी के लिए जल्द चुनाव होंगे, जिसके लिए प्रक्रिया चली हुई है। अलग कमेटी होने से प्रदेश के गुरुघरों का और ज्यादा बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। इस दौरान सांसद संजय भाटिया, पूर्व सांसद एवं अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन रहे त्रिलोचन सिंह, मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं हरियाणा सिख कमेटी के महासचिव रमणीक मान ने भी संबोधित किया जबकि इस दौरान हरियाणा कमेटी के प्रधान भूपिंद्र सिंह असंध व अन्य सिखनेता मौजूद रहे।
जिस पुस्तक का किया विमोचन, उसके टाइटल पर ही उठाए सवाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सूचना, लोक संपर्क, भाषा एवं संस्कृतिक विभाग की ओर से प्रकाशित एवं डॉ प्रभलीन द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया, लेकिन उन्होंने इसके टाइटल हरियाणा के सिखों की सेवा में खट्टर पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि इस टाइटल में जातीय भाव झलक रहा है, जो सही नहीं है। महापुरषों ने भी बिना भेदभाव के कार्य करना सिखाया है। उन्होंने कहा कि गुरुबाणी की सेवा जो बोले सो निहाल, सेवक बने मनोहर लाल टाइटल हो सकता है। इस पर लेखक को विचार करना चाहिए, ताकि हर पाठक तक सही संदेश जा जाए। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक का महत्व उसकी बनावट से नहीं बल्कि उसमें खिली गई सामग्री से होता है।