संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पिछले करीब ढाई साल से सेक्टर-17 सफाई का टेंडर नहीं हो पाया है, जिस कारण सिटी हार्ट कहे जाने से वाले इस सेक्टर में हालात काफी बिगड़ चुके हैं। कोई भी एसएसीओ ऐसा नहीं है जिसके आगे गंदगी का ढेर न लगा हो। इतना ही नहीं लोगों के सुविधा के लिए बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों पर भी ताले लटके हैं और इनमें से उठती तीव्र दुर्गंध पास से गुजर रहे लोगों को नाक बंद करने के लिए मजबूर कर रही है।
सेक्टर में दो मॉल, 97 एससीओ और 200 बूथ, तीन बैंक, एलआईसी दफ्तर, कई शिक्षण संस्थान, बड़ी कंपनियों की फूड चेन व रेहड़ी मार्केट स्थित हैं, जिन पर रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। ऐसे में अनदेखी की भेंट चढ़े सेक्टर में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह सेक्टर हरियाणा शहर विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के अधीन आता है। हैरानी की बात तो यह है कि एचएसवीपी के पास शहर के सिर्फ दो सेक्टरों की देखरेख का ही जिम्मा है, फिर भी अधिकारियों ने इन सेक्टरों का रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
सेक्टर-17 के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल ने बताया कि टेंडर को लेकर पांच बार सीएम विंडो पर शिकायत दे चुके हैं। एचएसवीपी के उच्चाधिकारियों सहित टेंडर का मुद्दा कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी उठा चुके हैं, लेकिन इतना कुछ करने के बावजूद भी एचएसवीपी की ओर से टेंडर नहीं लगाया गया।
सेक्टर 17 वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि पंचकूला से टेंडर अप्रूव हो चुका है, लेकिन पता नहीं क्यों नहीं अलॉट नहीं किया जा रहा। इसके पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है। शायद जब तक एचएसवीपी के संपदा अधिकारी नहीं आ जाते, तब तक टेंडर अलॉट नहीं हो पाएगा।
पूर्व सूबेदार रविंद्र कौशिक ने कहा कि सेक्टर में शिक्षण संस्थानों के आगे गंदगी के ढेर लगे हैं। इस बारे उन्होंने सीएम को ट्वीट भी किया था, तब एचएसवीपी के कर्मचारी आए थे और जेसीबी लगाकर गंदगी हटा दी थी, लेकिन बाद में फिर से हालात वैसे ही हो गए हैं। टेंडर न होने से सफाई नहीं हो पा रही है।
इस बारे में अधिकारियों से करेंगे बातचीत : पिलानी
एडीसी अखिल पिलानी ने कहा कि सेक्टर में सफाई के टेंडर को लेकर एचएसवीपी के अधिकारियों से बातचीत करेंगे। टेंडर की प्रक्रिया कहां अटकी हुई है, इस बारे में सारी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
एलआईसी की इमारत के साइड में पड़ी गंदगी। संवाद- फोटो : Kurukshetra
एससीओ 97 के आगे फैली गंदगी, यहां आसपास कई शिक्षण संस्थान हैं। संवाद- फोटो : Kurukshetra