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बंद पड़ी मुख्य सड़कों की लाइटें, अंधेरा और धुंध के कारण हो रहे हादसे

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बढ़ रही ठंडी में सुबह शाम धुंध के कारण दृश्यता 10 से 15 मीटर रहती है, ऐसे में रात को स्थिति और ज्यादा खराब हो रही है। धुंध के कारण दृश्यता कम होने से रात के अंधेरे में सड़क पर वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ऐसे में शहर के मुख्य मार्गों की बंद पड़ी लाइटें सफर को और ज्यादा खतरनाक बना रही हैं। लाडवा रोड, शहर की लाइफ लाइन गुलजारी लाल नंदा मार्ग, झांसा रोड, अमीर रोड, पिहोवा रोड, सलारपुर रोड, अमीन रोड सहित कई मुख्य मार्गों पर बहुत सी जगह लगी लाइटें रात के समय बंद रहती हैं। अधिकारी को कई बार धुंध से पहले सभी सड़कों पर हर प्रकार के प्रबंध करने के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके राहगीरों की जान खतरे में पड़ी हुई है। अकेले गुलजारी लाल नंदा मार्ग पर पिपली से लेकर थर्ड गेट तक नौ किलोमीटर की सड़क पर करीब 250 लाइटें लगी हुई हैं, लेकिन लापरवाही यह है कि इनमें से 70 प्रतिशत रात के समय बंद ही रहती हैं। ऐसे ही हाल अन्य मुख्य मार्गों के बने हुए हैं।
मोहन नगर वासी रविंद्र सैनी ने कहा कि कई बार वह रात के समय इन सड़कों पर सफर करना पड़ जाता है तो बहुत सोच समझकर जाना पड़ता है। वाहन की रफ्तार भी 10 से 20 ही रखनी पड़ती है। लाइटें बंद होने कारण न तो आगे चल रहा वाहन दिखाई देता और न ही सड़क।
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रामदास ने कहा कि आए दिन हादसे हो रहे हैं और प्रशासन है कि इन लाइटों को ठीक कराने का नाम ही नहीं ले रहा। अकेले गुलजारी लाल नंदा मार्ग पर पिछले कई साल से बहुत से लाइटें बंद पड़ी हैं। यह मुद्दा कई बार अधिकारियों के समक्ष जा चुका है, लेकिन हर बार ठीक करा देंगे ही सुनने को मिलता है।
सेक्टर-3 वासी शिवांग दत्त शर्मा ने कहा कि लाइटें बंद रहने से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। रात के समय कई हादसे तो ऐसे भी हैं, जिनका पता भी नहीं चलता। दुर्घटनाग्रस्त वाहन चालक प्रशासन को कोसते हुए उठकर गंतव्य की ओर रवाना हो जाता है। प्रशासन को चाहिए की सभी सड़कों पर लाइटें जलाने की व्यवस्था की जाए।
रेलवे रोड वासी प्रतीक गाबा ने कहा कि अंधेरे में धुंध के कारण सड़क पर बने गड्ढे तक दिखाई नहीं देते। चार पहिया वाहन इन गड्ढों में फसकर गिर जाते हैं। अगर सड़क रात के समय जगमग करे तो इन हादसों को रोका जा सकता है। रोड सेफ्टी की बैठक में अधिकारियों को इस मुद्दे को उठाना चाहिए।
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