कुरुक्षेत्र। सांसद खेल स्पर्धा के पहले दिन आयोजित मैराथन में बड़ी लापरवाही नजर आई। मैराथन में करीब 95 प्रतिशत स्कूली विद्यार्थियों की भागीदारी थी। दौड़ लगाने के लिए कैसी तैयारी के साथ आयोजन स्थल पर पहुंचना है इस बारे में बच्चों को पहले कोई जानकारी ही नहीं दी गई, जिसके चलते वे अपने स्कूल बैग साथ लेकर पुरुषोत्तमपुरा बाग में पहुंच गए। इतना ही नहीं कई बच्चों ने तो यूनिफार्म में शामिल लेदर के जूते डाल रखे थे, जिनमें दौड़ना बेहद मुश्किल है।
कड़ी धूप में जब बच्चों को स्कूल बैग कंधों पर लटका कर दौड़ाया गया तो ने 100 मीटर चलकर ही हांफने लगे। कई स्कूलों के बच्चे तो ऐसे भी थे जो मैराथन में दौड़े ही नहीं, वहीं कइयों ने रास्ते से ही यू-टर्न ले लिया। जो बच्चे 37 डिग्री सेल्सियस तापमान में करीब चार किलोमीटर की दौड़ लगाकर द्रोणाचार्य स्टेडियम पहुंचे।
पूछने पर उन्होंने बताया कि मैराथन के लिए क्या साथ लेकर आना है और क्या नहीं लेकर आना है इस बारे उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। बैग कंधे पर लटका कर दौड़ लगाते हुए काफी थक गए हैं। मैराथन में कुछ बच्चे तो ऐसे भी थे जो अपने साथ लाए बैग को पुरुषोत्तमपुरा बाग में छोड़कर ही दौड़ लगाकर द्रोणाचार्य स्टेडियम पहुंच गए और फिर बाद में आकर बैग को उठाया।
बच्चे जब धूप में हांफते हुए द्रोणाचार्य स्टेडियम की ओर बढ़ रहे थे तो कइयों को रास्ते में पीने का पानी तक नसीब नहीं हुआ। बहुत से बच्चे पानी से भरी बोतल साथ लेकर दौड़े रहे थे। ऐसे में उन्होंने ही अपने सहपाठियों को अपनी बोतल से पानी पिलाया। वहीं द्रोणाचार्य स्टेडियम पहुंचने पर रिफ्रेशमेंट के लिए भी बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग ने मैराथन में शामिल करीब 35 बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया, इसमें दौड़ लगाते हुए चक्कर खाने और चोटिल हो जाने वाले धावक शामिल थे। संवाद
सुबह साढ़े पांच बजे बुलाकर गीली घास पर बैठाए बच्चे
ब्रह्मसरोवर स्थित पुरुषोत्तमपुरा बाग से मैराथन को हरी झंडी दिखाने का समय सुबह छह बजे निर्धारित किया गया था, जिसके चलते बच्चों को सुबह साढ़े पांच बजे ही बुला लिया गया था। यहां पर उनके बैठने के लिए कोई प्रबंध भी नहीं था, जिस कारण उन्हें मजबूरन गीली घास के ऊपर ही बैठना पड़ा। 6:45 पर मुख्यमंत्री बाग में पहुंचे, जिसके बाद 07 बजकर 20 मिनट पर मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। तब तक गर्मी भी बढ़ गई थी।
बैग में सिर्फ पानी की बोतलें : अरुण आश्री
इस मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री से बात की गई तो उन्होंने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि कोई भी बच्चा स्कूल बैग लेकर मैराथन में आया था, लेकिन जब उनको कंधों पर बैग लटका कर दौड़ते हुए बच्चों की फोटो दिखाई गई तो उन्होंने कहा कि बैग में किताबें नहीं थी। इसमें में पानी की बोतल थीं।
मैराथन में कंधे पर बैग लेकर दौड़ती छात्राएं। संवाद- फोटो : Kurukshetra
मैराथन में हिस्सा लेती खिलाड़ी। संवाद- फोटो : Kurukshetra
मैराथन में हिस्सा लेने बाद गर्मी से बेहाल महिला खिलाड़ी पानी पीते हुई। संवाद- फोटो : Kurukshetra
द्रोणाचार्य स्टेडियम में रिफ्रेशमेंट लेने के लिए लगी खिलाड़ियों की भीड़। संवाद- फोटो : Kurukshetra
पसीना सुखाने के लिए कमीज उतारकर खड़ा खिलाड़ी। संवाद- फोटो : Kurukshetra