संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जीवन में समस्याएं बहुत हैं, लेकिन यह आपकी सोच पर निर्भर है कि आप इसे किस प्रकार लेते हैं। जीवन में अगर तनाव रहता है तो आप उसे मैनेज कर सकते हैं, लेकिन यदि यह मैनेज न हो पाए तो स्ट्रेस डिप्रैस में भी बदल जाता है. जिसका परिणाम घातक होता है। तनाव को दूर करने के लिए सोच को बदलने की जरूरत है। यह विचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर हरदीप जोशी ने मंगलवार को क्लर्कों के लिए आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी तुलना जब दूसरों से करता है तो वह तनाव में आता है, व्यक्ति को अपनी विशिष्टता का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि तनाव दो प्रकार का होता है सकारात्मक एवं नकारात्मक। नकारात्मक तनाव में आपके दैनिक जीवन में बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि यदि आपकी नौकरी लग जाए तो नौकरी के स्टेशन न मिले तो सकारात्मक तनाव होता है। प्रो. जोशी ने कहा कि सभी लोगों का तनाव एक जैसा नहीं होता है। व्यक्तिगत रूप से हर व्यक्ति की परिस्थिति के अनुसार अलग प्रतिक्रिया होती है। सकारात्मक एवं नकारात्मक तनाव में सामंजस्य बनाना जरूरी है। जब लगातार तनाव के कारण गुबार बन जाता है तो व्यक्ति को अपने विचार शेयर करने की जरूरत होती है।
मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार प्रतिदिन 40 मिनट की सैर भी तनाव को दूर करने में सहायक है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि रात को सोते समय यह सोचकर सोएं की आज का काम खत्म हो चुका है। इसके बाद 10 मिनट के लिए अपनी सांसों पर ध्यान दें।प्रो. जोशी ने तनाव प्रशिक्षण को लेकर कर्मचारियों को मसल्स आधारित शारीरिक क्रियाएं भी करवाई गई जो तनाव को कम करने में सहायक होती हैं।
रिफ्रेशर कोर्स के नोडल ऑफिसर व परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने बताया कि तनाव को दूर करने के प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मचारियों को मानसिक तौर पर सशक्त बनाना है। कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. सुनील ढुल ने कहा कि यह रिफ्रेशर कोर्स विश्वविद्यालय में कार्यरत सभी गैरशिक्षक कर्मचारियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। संचालन वर्षा ने किया। इस दौरान स्थापना शाखा के सहायक मनदीप शर्मा, लिपिक वर्षा, सौरभ दहिया, मोहित शारदा आदि उपस्थित रहे।